मुख्यमंत्री एवं एफएमडीए के चेयरमैन मनोहरलाल के आदेश पर प्राधिकरण ने तैयार की सर्वे की योजना
सर्वे में देखा जाएगा कि भविष्य में जिले को कितने पानी की होगी जरूरत, क्या-क्या किए जा सकते हैं इंतजाम
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। पेयजल समस्या से जूझ रहे शहर वासियों के लिए राहत की खबर है। फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) की ओर से भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आईआईटी दिल्ली से सर्वे कराया जाएगा। नए सिरे से पेयजल आपूर्ति का ब्लू प्रिंट तैयार होगा। सर्वे में देखा जाएगा कि भविष्य में जिले काे कितने पानी की जरूरत होगी, क्या-क्या इंतजाम किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री एवं एफएमडीए के चेयरमैन मनोहरलाल के निर्देश पर प्राधिकरण ने योजना पर कार्य शुरू कर दिया है।
स्मार्ट सिटी फरीदाबाद में पेयजल की सप्लाई यमुना किनारे लगे 22 रेनीवेल से होती है। वहीं शहर के अंदर 1700 ट्यूबवेल लगाए गए हैं, जिनसे पानी की सप्लाई नगर निगम करता है। जिले में प्रतिदिन पानी की मांग 450 एमएलडी है, लेकिन एफएमडीए हर रोज 340 एमएलडी पानी ही सप्लाई कर पा रहा है। यानी की कुल 110 एमएलडी पानी की अभी कमी है। जिस कारण लोग प्राइवेट टैंकरों पर निर्भर हैं। गर्मियों के सीजन में तो पीने के पानी की समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। सबसे ज्यादा दिक्कत बड़खल और एनआईटी विधानसभा में होती है, क्योंकि रेनीवेल पूर्वी दिशा में लगे हैं। वहां से पानी पाइप लाइनों के माध्यम से पश्चिमी हिस्से तक पहुंचाया जाता है। लेकिन पश्चिमी हिस्से तक पानी आते-आते कम हो जाता है, क्योंकि रास्ते में इतने सारे सेक्टर और इलाके हैं, पानी वहीं पर ही खत्म हो जाता है। यही स्थिति अब सेक्टर-22, 23, 55, राजीव कॉलोनी, डबुआ, भगत सिंह कॉलोनी आदि क्षेत्रों की बनी हुई है। इस समस्या के समाधान के लिए एफएमडीए ने एक साल पहले गुरुग्राम स्थित मुनक नहर से पानी लाने की योजना तैयार की थी, लेकिन वह योजना कागजों में सिमट कर रह गई। यदि आईआईटी दिल्ली के सर्वे के आधार पर पानी सप्लाई की योजना सिरे चढ़ती है तो एनआईटी और बड़खल विधानसभा में पानी की समस्या पूरी तरह दूर हो जाएगी।
स्काडा योजना से भी लोगों को समान रूप से नहीं मिल रहा पानी
फरीदाबाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी की ओर से शहर में पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन) शुरू की गई। स्काडा के तहत शहर के पेयजल सिस्टम का वितरण समान रूप से होने का दावा किया गया था। शुरुआत में अधिकारियों ने कहा था कि स्काडा के तहत शहर के पेयजल का वितरण समान रूप से होगा। कहीं भी पानी की लाइन में लीकेज व चोरी कमांड एंड कंट्रोल सेंटर में पता लग जाएगी। इसकी निगरानी स्मार्ट सिटी के अधिकारी अपने मोबाइल फोन पर भी कर सकेंगे। इस प्रोजेक्ट के तहत सभी बूस्टरों पर सेंसर लगाए जाएंगे। यहां कितना पानी आया और कितना आगे सप्लाई किया गया। दावा है कि इस प्रोजेक्ट के लागू होने के बाद पानी की बर्बादी भी नहीं होगी। लेकिन यह योजना भी लोगों को राहत नहीं दे सकी।
शहर में पेयजल आपूर्ति को बेहतर करने के लिए दिल्ली आईआईटी का सहारा लिया जाएगा। बातचीत जारी है, फाइनल होने के बाद सर्वे का काम शुरू करा दिया जाएगा। - विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, एफएमडीए