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Faridabad News: किसान आंदोलन लंबा खिंचा तो फिर बढ़ेगी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की समयसीमा

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सोतई में 680 मीटर जमीन पर कब्जा न मिलने से आठ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड हिस्से का काम अटका
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जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया है
75 प्रतिशत काम पूरा हुआ, पहले 2024 में होना था पूरा

केशव भारद्वाज

फरीदाबाद। नोएडा (जेवर) हवाई अड्डे पर आवाजाही के लिए बनाया जा रहा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक बार फिर किसानों के विरोध के कारण संकट में फंसता नजर आ रहा है। सोतई गांव में करीब 680 मीटर जमीन पर कब्जा नहीं मिलने के कारण एक्सप्रेसवे के आठ किलोमीटर लंबे एलिवेटेड हिस्से का निर्माण प्रभावित हो रहा है। जमीन के मुआवजे को लेकर किसानों ने बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। यदि आंदोलन लंबा खिंचा तो परियोजना की मौजूदा अप्रैल 2027 की समयसीमा भी आगे बढ़ सकती है।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का करीब 75 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। परियोजना को पहले वर्ष 2024 के सितंबर माह तक पूरा किया जाना था, लेकिन अलग-अलग कारणों से इसकी समयसीमा बढ़ती गई। अब एनएचएआई प्रबंधन के सामने सोतई में जमीन का मामला सबसे बड़ी अड़चन बनकर सामने आया है। दरअसल, सोतई गांव में एनएचएआई को जिस करीब 680 मीटर जमीन की जरूरत है, उस पर स्थानीय किसानों का कब्जा है। किसानों की ओर से जमीन पर अपना मालिकाना हक साबित करने से संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए थे। एनएचएआई की ओर से जमीन का मुआवजा जारी कर दिया गया, लेकिन नगर निगम प्रशासन ने जमीन पर अपना दावा जताते हुए किसानों को मुआवजा दिए जाने पर आपत्ति दर्ज करा दी। अब यह मामला अदालत में विचाराधीन है।
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इसी बीच पिछले सप्ताह एनएचएआई प्रबंधन ने पुलिस की मदद से जमीन पर कब्जा लेने का प्रयास किया। इसका किसानों ने विरोध किया और मौके पर बेमियादी धरना शुरू कर दिया। ऐसे में यदि धरना लंबे समय तक जारी रहा तो एलिवेटेड हिस्से के निर्माण में देरी होना तय माना जा रहा है।


मोहना आंदोलन से पहले ही 13 महीने हुई थी देरी
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की समयसीमा पहले भी किसान आंदोलन के कारण प्रभावित हो चुकी है। मोहना गांव में कट की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन वर्ष 2022 में शुरू हुआ था और अक्टूबर 2024 तक चला। आंदोलन के कारण करीब 13 महीने तक लगभग चार किलोमीटर क्षेत्र में निर्माण कार्य प्रभावित रहा था। किसानों ने यमुना पुल के निर्माण को भी रुकवा दिया था। इसके चलते परियोजना की डेडलाइन बढ़ानी पड़ी थी।

इसके अलावा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के निर्माण से मास्टर प्लान-2031 की योजनाओं में गड़बड़ी की आशंका जताई थी। इसके बाद एनएचएआई प्रबंधन ने एक्सप्रेसवे के करीब आठ किलोमीटर हिस्से को एलिवेटेड बनाने का निर्णय लिया। इन तमाम वजहों से परियोजना की समयसीमा बढ़ाकर अप्रैल 2027 की गई। अब सोतई में 680 मीटर जमीन का विवाद इस परियोजना के लिए नई चुनौती बन गया है। यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो एलिवेटेड हिस्से का निर्माण प्रभावित होने के साथ पूरे एक्सप्रेसवे की डेडलाइन एक बार फिर बढ़ने की नौबत आ सकती है।


एक नजर में परियोजना
27 सितंबर 2022 को काम शुरू हुआ था

30 सितंबर 2024 तक निर्माण कार्य पूरा होना था
30 जून 2025 तक बढ़ाई गई थी पहली समयसीमा

30 अप्रैल 2027 की गई दूसरी समयसीमा
3600 करोड़ से ज्यादा बजट खर्च हो रहा है एक्सप्रेसवे के निर्माण पर

31 किलोमीटर से ज्यादा लंबाई है एक्सप्रेसवे की
18 मिनट में नोएडा हवाई अड्डे से सेक्टर-65 के सामने डीएनडी-एक्सप्रेसवे तक पहुंच सकेंगे


एनएचएआई प्रबंधन इस जमीन के लिए मुआवजा पहले ही जारी कर चुका है। इसमें हमारी तरफ से कोई चूक नहीं है। मुआवजा जारी करने के बावजूद हम काम नहीं कर पा रहे हैं।- धीरज सिंह, परियोजना निदेशक, एनएचएआई
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जमीन पर किसानों का कब्जा है। किसानों को मुआवजा मिलना चाहिए। किसान विरोध नहीं करेंगे तो उन्हें मुआवजा भी नहीं मिलेगा। किसान जमीन के मालिक हैं, उन्हें मुआवजा मिलना चाहिए। -सतपाल नरवत, किसान संघर्ष समिति , नहरपार
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