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कोरोना मरीजों की संख्या बढ़ने से अस्पतालों में आईसीयू-वेंटिलेटर बेड फुल

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फरीदाबाद (संजय शिशौदिया)। जिले में कोरोना मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ अस्पतालों में बेडों की संख्या घटने लगी है। गंभीर संक्रमितों के लिए आईसीयू और वेंटिलेटर की कमी है। इस कारण सरकारी और निजी अस्पतालों में इसके लिए सिफारिशों का दौर भी शुरू हो गया है। फिर भी स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि नौ सौ पैंतालिस बेड आरक्षित हैं।
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एनआईटी तीन स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल का आईसीयू भर चुका है। यहां बेड के लिए विधायक और मंत्री की सिफारिश लेकर आनी पड़ रही है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जिले में कोविड से निपटने के पूरे इंतजाम हैं। कोरोना मरीजों के लिए आधे से ज्यादा आरक्षित बेड अभी खाली हैं। वहीं, अगर वेंटिलेटर की बात की जाए तो जिले में कुल 110 वेंटिलेटर बेड हैं। इनमें से ज्यादातर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
मंगलवार को जिले में सबसे अधिक 756 मरीजों की पुष्टि स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई थी। बुधवार को भी 606 नए संक्रमितों की पुष्टि की गई है। इससे अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या कम पड़ने लगी है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, जिले में कोविड मरीजों के लिए 945 बेड आरक्षित हैं। इनमें से 540 बिस्तर अभी मरीजों के लिए खाली है।
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जिले के सबसे बड़े ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल को कोविड अस्पताल घोषित किया हुआ है। यहां कोविड मरीजों के लिए 429 बेड हैं। इसमें आईसीयू, वेंटिलेटर के बेड भी शामिल हैं। इनमें से अभी सिर्फ 71 बेड पर मरीज हैं, अन्य खाली हैं। अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, आईसीयू मरीजों से भरा हुआ है। मौजूदा समय में यहां प्रतिदिन चार मरीजों की वेटिंग चल रही है।
जिले के अस्पतालों में बेडों की स्थिति
अस्पताल कुल आइसोलेशन बेड भरे हुए बेड रिक्त
मेट्रो अस्पताल 49 19 30
क्यूआरजी सेंट्रल 35 33 02
क्यूआरजी मेडिसिटी 82 78 04
सर्वोदय अस्पताल 85 85 00
पार्क अस्पताल 40 30 10
एस्कोर्ट फोर्टिस 53 39 14
सुप्रीम अस्पताल 10 10 00
अलफला अस्पताल 75 00 75
एशियन अस्पताल 107 70 37
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज 429 71 358
कोट
बेड नहीं मिलने की समस्या कई जगह आ रही है। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में आईसीयू बेड फुल हो सकते हैं। इसके लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। साथ ही वेंटिलेटर दो प्रकार के होते है। इनवेजिव और नॉन इनवेजिव। इनवेजिव वालों पर गंभीर मरीजों का इलाज किया जाता है, जबकि नॉन इनवेजिव वाले पर कम गंभीर मरीजों का इलाज होता है। जिले की बात की जाए तो स्वास्थ्य विभाग के पास करीब दो हजार बेड अभी आरक्षित हैं। इनमें ऑक्सीजन की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इसलिए मरीजों को घबराने की जरूरत नहीं है, जरूरत पड़ने पर इन्हें शुरू किया जाएगा।
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- डॉ. रणदीप पुनिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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