फरीदाबाद। खोरी गांव में तोड़फोड़ का मामला अब राजनीतिक हो चला है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश में साफ है कि जमीन को खाली कराया जाए। जमीनी हालात ये हैं कि तोड़फोड़ की कार्रवाई करना आसान नहीं है। बुधवार को गांव में हुए उपद्रव के बाद से गेंद दोबारा से दबंगों के पाले में चली गई है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी के आने से लोगों में अब उत्साह बढ़ गया है। सरकार से बात करने के लिए चढूनी की मौजूदगी में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया। ये कमेटी सरकार के सामने लोगों की बात रखेगी। इसमें दिलचस्प बात ये है कि कमेटी के पांच में से तीन सदस्यों के ऊपर खोरी गांव में जमीन की खरीद फरोख्त करने के मामले दर्ज हैं।
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद पुलिस ने सर्वे का काम शुरू कर दिया, लेकिन लोग अपनी जानकारी देने से कतरा रहे हैं। गांव के एक युवक ने बताया कि वह करीब दस साल से गांव में रह रहा है। उसने जमीन सलीम खान से खरीदी थी। युवक का कहना है कि पुलिस सलीम खान के घर में बैठकर गांव के लोगों से पूछ रही है कि भूमाफिया कौन था। ऐसे में कौन सामने आकर झगड़े का भागीदार बनेगा। गांव के इस्लाम चौक निवासी महिला ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कमेटी के सदस्यों में शामिल गवाद प्रसाद और निर्मल चर्च कमेटी से जुड़े हुए हैं। खोरी में करीब दो हजार गज जमीन में चर्च बना हुआ है। साथ लगती ज्यादातर जमीनों पर मकान बनाने से पहले इन दोनों की सहमति अनिवार्य है।
गांव के लोगों का कहना है कि कमेटी में उन लोगों को पदाधिकारी बना दिया गया है, जो खुद जमीन की खरीद-फरोख्त में शामिल रहे हैं। पांच लोगों की एक कमेटी में सलीम खान, फुलवा देवी, मोहम्मद मोहसिन, निर्मल गिराना व गवाद प्रसाद का नाम शामिल है। कमेटी की मांग है कि पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए लोगों को रिहा किया जाए। गांव के लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को खारिज किया जाए। गांव में बिजली-पानी की सुविधा को तत्काल बहाल किया जाए। भूमाफियाओं के खिलाफ कार्रवाई के बाद ही तोड़फोड़ की शुरुआत की जाए।
उपद्रव के बाद से ग्रामीण कर रहे घर वापसी
बुधवार को पुलिस और खोरी गांव के निवासियों के बीच हुए बवाल ने प्रशासन की अभी तक की तैयारियों पर पानी फेरने का काम कर दिया है। बुधवार से पहले काफी लोग गांव से पलायन कर चुके थे। कमेटी के गठन और पुलिस के सामने खड़े होने की हिम्मत ने गांव से बाहर रह रहे लोगों के जेहन में उम्मीद की किरण जगा दी है। गांव में अब लोग दिल्ली के रास्ते से वापस लौटने लगे हैं। इस बारे में खुफिया विभाग ने सरकार तक जानकारी भी भेजी है। कमेटी के सदस्य भी लोगों से कह रहे हैं कि कोई भी उनसे बिना पूछे पुलिस से बात नहीं करे। नतीजा ये हैं कि दो दिन के सर्वे के बावजूद पुलिस गांव के लोगों की सही जानकारी एकत्रित करने की शुरुआत भी नही कर पाई है।
कैसे निकल सकता है समाधान
गांव के एक बुजुर्ग का कहना है कि यहां ज्यादातर लोग मजदूर हैं। भूमाफिया का नाम लेने से लोग डरते हैं। गांव में सभी के पास जमीन की खरीद के समय के कागज हैं, जिन्हें भूमाफिया ने जीपीए व रकम का फुल फाइनल एग्रीमेंट कहकर दिया था। इन कागजों में जमीन की खरीद व बिक्री करने वालों के नाम व फोटो तक लगे हुए हैं। सरकार घोषणा कर दे कि जिसके पास कागज है उनका पुनर्वास होगा। गांव के लोग अपने कागज दिखाएंगे उससे आरोपियों का डाटा एकत्रित कर ली जाए। सूरजकुंड थाने में भी पुराने दर्ज मामलों में भूमाफिया के रिकार्ड हैं। सभी आरोपी गांव में आराम से घूम रहे हैं। जिसके कारण लोग दबंगों के खिलाफ बोलने से डरते हैं।