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Faridabad News: सूरजकुंड और बल्लभगढ़ में 30 मई को होगी ऐतिहासिक वॉक

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औद्योगिक पहचान से आगे बढ़कर अब हेरिटेज सिटी बनने की राह पर फरीदाबाद
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। अब तक उद्योग और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं के लिए पहचाने जाने वाला फरीदाबाद अपनी ऐतिहासिक विरासत को नई पहचान देने की तैयारी में है। हरियाणा सरकार की आओ चलें अपनी विरासत के साथ पहल के तहत जिले के दो सबसे अहम ऐतिहासिक केंद्र सूरजकुंड और राजा नाहर सिंह महल को हेरिटेज एंड सिटी वॉक के लिए चुना गया है। 30 मई को सुबह छह से आठ बजे तक आयोजित होने वाली यह वॉक फरीदाबाद को केवल औद्योगिक शहर नहीं बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

पर्यटन एवं विरासत मंत्री अरविंद शर्मा द्वारा घोषित कार्यक्रम के तहत प्रदेश में विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसका लाभ शहर के ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, सुरक्षा और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार में मिलने की उम्मीद है। पर्यटन विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल रखा है। प्रतिभागी वेबसाइट और क्यूआर कोड के माध्यम से पंजीकरण कर सकेंगे। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य युवाओं और छात्रों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करना है।
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अरावली और प्राचीन जल संरचना से रूबरू कराएगी सूरजकुंड वॉक

सूरजकुंड जलाशय से शुरू होने वाली हेरिटेज वॉक प्रतिभागियों को इतिहास और प्रकृति के मिश्रण का अनुभव कराएगी। माना जाता है कि इस जलाशय का निर्माण 10वीं शताब्दी में तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने कराया था। यह जलाशय उत्तर भारत की प्राचीन जल संचयन प्रणालियों में गिना जाता है। वॉक का दूसरा चरण असोला-भाटी वन्यजीव अभयारण्य तक जाएगा जहां प्रतिभागियों को अरावली क्षेत्र की जैव विविधता, प्राकृतिक वनस्पतियों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। पर्यटन विभाग का मानना है कि इससे लोगों को यह समझाने में मदद मिलेगी कि सूरजकुंड केवल अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले तक सीमित नहीं है बल्कि यह ऐतिहासिक और पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।
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बल्लभगढ़ में जीवंत होगा 1857 के संघर्ष का इतिहास

दूसरी हेरिटेज वॉक बल्लभगढ़ की ऐतिहासिक गलियों और रियासतकालीन धरोहरों पर केंद्रित रहेगी। इसकी शुरुआत राजा नाहर सिंह महल से होगी जो 18वीं सदी की स्थापत्य कला का प्रमुख उदाहरण माना जाता है। महल के दरबार-ए-आम, नक्काशीदार झरोखे और प्राचीन आंगन प्रतिभागियों को उस दौर की संस्कृति और शासन व्यवस्था से परिचित कराएंगे। यह वॉक आगे बढ़ते हुए रानी की छतरी तक पहुंचेगी। इतिहासकार बताते हैं कि राजा नाहर सिंह ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। ऐसे में यह वॉक युवा पीढ़ी को स्थानीय स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान से जोड़ने का माध्यम भी बनेगी।
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