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Faridabad News: बीके अस्पताल में एक महीने से बंद पड़ा है हार्ट सेंटर

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डॉक्टर नहीं होने के चलते प्रवेशद्वार पर लगाया गया है नोटिस, मरीजों को हो रही परेशानी
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में पीपीपी मोड पर चल रहा हार्ट सेंटर एक महीने से बंद पड़ा है। जिससे अस्पताल में पहुंचने वाले मरीज बिना उपचार के ही वापस लौट रहे हैं। हरियाणा के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है। प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप के तहत दिल के मरीजों को आईपीडी सेवाएं तो दूर ओपीडी सेवाएं तक नहीं मिल रहीं हैं।

अस्पताल में फरीदाबाद के अलावा कई अन्य स्थानों से मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं ताकि उन्हें बेहतर इलाज मिल सके, लेकिन हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। अस्पताल में दूर- दूर से पहुंचने वाले लोग बिना इलाज के वापस लौट रहे हैं, जिससे उन्हें बाहर उपचार कराना पड़ता है। इससे सबसे ज्यादा प्रभाव उनकी जेब पर पड़ता है।
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जिले में तीन मंत्री होने के बावजूद नहीं निकला समाधान


बीके अस्पताल की पीएमओ और जिले के सीएमओ ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। फरीदाबाद से केंद्रीय राज्यमंत्री कृष्णपाल गुर्जर, हरियाणा सरकार में नगरीय विकास मंत्री विपुल गोयल और खाद्य आपूर्ति मंत्री राजेश नागर भी फरीदाबाद से ही हैं। शहर में तीन मंत्रियों के होने के बावजूद फरीदाबाद और पलवल के दिल के मरीजों को दिल की बीमारी के इलाज के लिए दर- दर की ठोकरें खानी पड़ रही है।

हरियाणा का चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग दिल के मरीजों को मुफ्त चिकित्सा सुविधाएं देने में नाकाम साबित हो रहा है। अपने ही हार्ट सेंटर पर सरकारी अधिकारियों ने झूठी शिकायतों पर इतनी कार्रवाई कर दी कि कंपनी को हार्ट सेंटर को बंद करने का निर्णय लेना पड़ा और अब यहां कोई भी कार्डियोलॉजिस्ट व स्टॉफ काम करने को तैयार नहीं है। मरीज निजी अस्पतालों में दिल का महंगा इलाज करवा रहे हैं। जबकि बीके हार्ट सेंटर में माह में करीब 40 एंजियोप्लास्टी की जा रही थी।

कार्रवाई के बाद से बंद पड़ा हार्ट सेंटर



बीके अस्पताल की तीसरी मंजिल पर चल रहे हार्ट सेंटर पर वर्ष 2022 में आयुष्मान कार्ड में फर्जी वाडा कर मरीजों से कैश भुगतान उठा लेने और सरकार से भी पैसा उठाने के आरोप लगे थे। जिसके बाद प्रबंधन की जांच में करीब दो दर्जन केस इस तरह के पाए गए और 12 लाख की धोखाधड़ी के आरोप में हार्ट सेंटर के पूर्व प्रमुख मानसिंह समेत फर्जी आयुष्मान कार्ड बनाने वाले चार कर्मचारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसके बाद से ही हार्ट सेंटर की मुश्किलें बढ़ती चली गई।
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हार्ट सेंटर का मामला सीधे चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक स्वयं देख रहे हैं। ऊपर लेवल पर क्या निर्णय हुआ है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। लेकिन दिल के मरीजों को सेवाएं मिलनी चाहिए। कंपनी को फिर से सेंटर शुरू करना चाहिए।
- डॉ. जयंत आहूजा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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