गुर्जर महोत्सव में समाज के बारे में गहराई से समझने के लिए आयोजकों ने गुर्जरों के अलग-अलग गोत्र और खाप के बारे में बताने और समझाने के लिए अलग-अलग चौपाल लगाई हैं। पुरानी छोटी चौपाल के पास ही सभी चौपालों को सजाया गया है।
सूरजकुंड मेला परिसर में आयोजित गुर्जर महोत्सव का शनिवार को आगाज हो गया। पहला दिन होने के कारण मेला थोड़ा देरी से शुरू हुआ। दिन चढ़ने के साथ मेले का रंग भी लोगों पर चढ़ने लगा। दूर- दूर से आए लोगों ने मेले की चौपाल पर हो रहे कार्यक्रमों का जमकर लुत्फ उठाया। सबसे ज्यादा आनंद में महिलाएं दिखाई दीं। घर से घूंघट की ओट में आईं महिलाओं ने मेले में कदम रखते ही थिरकना शुरू कर दिया। संस्कृति की झलक के साथ ही देसी-विदेशी गानों की धुन पर महिलाओं व युवतियों ने नृत्य के साथ समा बांध दिया।
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मुख्य चौपाल पर हो रहे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में कव्वाली ने लोगों का मन मोह लिया। स्कूली बच्चों की अलग-अलग प्रस्तुतियों ने भी लोगों की खूब वाहवाही बटोरी। खासकर नुक्कड़ नाटक से जरिए महिलाओं की दशा पर कटाक्ष करते हुए उनकी पढ़ाई और कामकाजी होने का संदेश देकर छात्राओं ने सबका मन मोह लिया। छोटी चौपाल पर बज रहे डीजे पर पूरी तरह से महिलाओं का ही कब्जा था। देसी गाने बजते ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दे रहीं कलाकारों के बीच ही महिलाएं जा पहुंचीं और स्टेज पर धाक जमा दी।
घोड़ी का डांस और चौधरी की पगड़ी के अलग दीवाने
मेले में लोगों को चौधरी की पगड़ी खूब पसंद आई। ज्यादातर बुजुर्ग और जमींदार घर से ही पगड़ी बांधकर आए थे, लेकिन यहां बांधी जा रही ऊंची पगड़ी युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित कर रही थी। मेले में आने वाले युवकों के साथ युवतियाें ने भी पगड़ी बंधवाई। घोड़ी के डांस को देखने के लिए लोग काफी उत्साहित नजर आए। गांव के साथ ही शहरों में रहने वाले गुर्जर समुदाय के लोग भी मेले में आए।
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अलग -अलग गोत्र और खाप ने लगाईं अपनी चौपाल
गुर्जर महोत्सव में समाज के बारे में गहराई से समझने के लिए आयोजकों ने गुर्जरों के अलग-अलग गोत्र और खाप के बारे में बताने और समझाने के लिए अलग-अलग चौपाल लगाई हैं। पुरानी छोटी चौपाल के पास ही सभी चौपालों को सजाया गया है। यहां बुजुर्ग और युवा सभी एक साथ हुक्का गुड़गुड़ाते भी नजर आ जाएंगे। स्कूली छात्र हुक्के के साथ अपनी फोटो खिंचवाना नहीं भूल रहे हैं। इसी के ठीक साथ में पुरानी कथाओं को बताने वाली ज्ञान वर्धक रागनियों का एक मंच सजाया गया है। समाज का बखान करती ये रागनियां जब ढोलक और बैंजो की धुन के साथ सुनाई जाती है तो लोग इसपर भी थिरकने लगते हैं।