फरीदाबाद। प्रदेश में पिछले दिनों खुले 1100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले में जिले की 22 फर्मों पर शक जताया जा रहा है। आरोप है कि इनके मालिकों ने दूसरों के कागजात पर फर्म बनाई और विभाग से इनपुट क्रेडिट टैक्स (आईटीसी) का लाभ लेने का प्रयास किया। जीएसटी विभाग की शुरुआती जांच में इन फर्मों को फर्जी माना गया है।
जीएसटी विभाग ने कुछ महीने पूर्व सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी। इससे प्रदेश में 1100 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले का खुलासा हुआ था। इनमें 69 फर्जी फर्मे बनाकर फर्जीवाड़े का पता चला। सबसे अधिक फर्जी फर्में गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक और सोनीपत में पाई गईं। इन फर्मों ने यहां से पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में माल बेचना दर्शाया। कुछ ने खरीद दिल्ली से तो कुछ ने कहीं से कुछ भी खरीद नहीं दिखाई। जून 2020 में इन फर्जी फर्मों के पंजीकरण रद्द कर दिए गए। इन फर्मों ने 78 अरब 65 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दिखाकर सरकार से अरबों रुपयों का इनपुट क्रेडिट ले लिया। घोटाला उजागर होने के बाद आनन-फानन में 28.54 लाख रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। इस मामले में फरीदाबाद जीएसटी विभाग की टीम ने भी जांच की तो 22 फर्में फर्जी पाई गईं। अधिकारियों ने मौके पर जाकर जांच की तो पते पर कोई फर्म नहीं थी।
जिले में 22 फर्में शक के दायरे में हैं। इन्होंने कितने रुपये का घोटाला किया, अभी बताना मुश्किल है। जिन राज्यों में इन फर्मों ने व्यापार किया, उनके अधिकारियों को पत्र लिखकर सूचित कर दिया गया है। जांच के बाद ही आगे कुछ बताया जा सकता है।
- रविंद्र सिंह, उप आबकारी एवं कराधान आयुक्त (पश्चिम)