200 रुपये में होने वाली जांच मरीजों को एक हजार रुपये देकर करानी पड़ रही है
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। बीके अस्पताल में सरकारी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण सरकारी इको मशीन को बंद कर दिया गया है। अस्पताल में इको जांच कराने आने वाले मरीजों को काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है। मशीन के बंद होने के कारण 200 रुपये में होने वाली इको जांच अस्पताल में पीपीपी मोड पर चल रहे हृदय रोग विभाग में करीब एक हजार रुपये में हो रही है। इस कारण मरीज या तो बाहर से इको कराते है या फिर अस्पताल में बने पीपीपी मोड चल रहे हृदय रोग विभाग में कराते हैं।
बीके अस्पताल में प्रतिदिन करीब दो से ढाई हजार मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। जिनमें से करीब 200 मरीज हृदय रोग विभाग की ओपीडी में इलाज के लिए आते हैं। इनमें से कई मरीजों की इको की जांच की जाती है, लेकिन अस्पताल में सरकारी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण सरकारी इको मशीन को बंद कर दिया गया है। मशीन बंद होने से पहले मरीजों को इको जांच कराने के लिए 200 रुपये देने होते थे, लेकिन कोरोना काल में इसे बंद कर दिया गया। इसके बाद 2022 में कार्डियोलॉजिस्ट के स्थानांतरित होने के बाद से ही इको मशीन को बंद कर दिया गया है । वहीं, फिलहाल बीके अस्पताल में हृदय रोग विभाग पीपीपी मोड पर चल रहा है। जिसमें इको की जांच कराने के लिए मरीज को करीब एक हजार रुपये देने पड़ते हैं। इससे मरीजों की आर्थिक स्थिति पर काफी असर पड़ता है।
पीएनडीटी विभाग के अंडर में चल रही थी इको मशीन
बीके अस्पताल में इको करने के लिए पीएनडीटी विभाग की ओर से सरकारी इको मशीन को चलाया जा रहा था। अस्पताल में सरकारी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं होने के कारण उसे छह महीने बाद बंद कर दिया गया था।
बीके अस्पताल में करीब 3 से 4 साल पहले इको मशीन लाई गई थी। जिसका इस्तेमाल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. नवीन गर्ग करते थे, लेकिन उनके स्थानांतरित होने के बाद मशीन को बंद कर दिया गया। अब इको जांच करने के लिए अस्पताल में कोई सरकारी डॉक्टर मौजूद नहीं है। जिस कारण सरकारी ओपीडी में इको जांच नहीं की जा रही है। -
डॉ. हरीश आर्या, पीएनडीटी नोडल अधिकारी