660 करोड़ का स्वच्छता ब्लूप्रिंट तैयार, करीब 15 लाख की आबादी को फायदा होगा
तकनीक के जरिये हर गतिविधि की निगरानी भी होगी।
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। औद्योगिक नगरी फरीदाबाद की बिगड़ी सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए नगर निगम ने अब तक की सबसे बड़ी और व्यापक योजना लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। करीब 660 करोड़ रुपये के इस महत्वाकांक्षी स्वच्छता ब्लूप्रिंट के तहत शहर की सफाई व्यवस्था को पूरी तरह बदला जा रहा है। इसमें 3.40 लाख घरों, दुकान व प्रतिष्ठानों से रोजाना कचरा उठाया जाएगा। जिससे करीब 15 लाख की आबादी को फायदा होगा। वहीं तकनीक के जरिये हर गतिविधि की निगरानी भी होगी।
लंबे समय से कूड़े के ढेर, अनियमित उठान और कर्मचारियों की कमी जैसी समस्याओं से जूझ रहे शहर के लिए यह योजना एक निर्णायक बदलाव के रूप में देखी जा रही है। निगम ने इस बार बड़े स्तर पर बजट आवंटित करने के साथ काम में लापरवाही पर कड़ी सजा और पारदर्शी भुगतान प्रणाली भी लागू की है जिससे पुराने सिस्टम की कमियों को खत्म करने की कोशिश की गई है।
दो जोन ईस्ट और वेस्ट में बंटेगा शहर
नगर निगम ने फरीदाबाद को दो बड़े जोन ईस्ट और वेस्ट में बांटकर सफाई व्यवस्था को व्यवस्थित करने की रणनीति अपनाई है। ईस्ट जोन में ओल्ड फरीदाबाद, तिगांव और बल्लभगढ़ के कुछ हिस्से शामिल किए गए हैं जबकि वेस्ट जोन में एनआईटी और आसपास के इलाके आते हैं। दोनों जोन के लिए अलग-अलग एजेंसियां नियुक्त की जाएंगी जो घर-घर कचरा संग्रहण से लेकर प्रोसेसिंग साइट तक उसका निस्तारण सुनिश्चित करेंगी। करीब 15 लाख की आबादी और 3.40 लाख से अधिक घरों, दुकानों व संस्थानों को इस दायरे में लाकर सफाई व्यवस्था को एकीकृत करने की योजना है।
तकनीक के सहारे तय की जाएगी जवाबदेही
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसका तकनीकी ढांचा है। कूड़ा उठाने वाले सभी वाहनों पर जीपीएस अनिवार्य होगा जिससे कंट्रोल रूम से उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा सकेगी। सफाई कर्मचारियों की हाजिरी अब बायोमेट्रिक मशीनों से होगी जिससे फर्जी उपस्थिति या कागजी कर्मचारियों की समस्या खत्म करने का दावा किया जा रहा है। इसके साथ ही शिकायतों के निस्तारण के लिए अलग से कंप्लेंट रिड्रेसल सिस्टम बनाया जाएगा जहां नागरिकों की शिकायतों को तय समय सीमा में निपटाना एजेंसियों के लिए अनिवार्य होगा।
377 करोड़ व 282 करोड़ किए जाएंगे खर्च
ईस्ट जोन के लिए लगभग 377.88 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जिसमें ओल्ड फरीदाबाद, तिगांव और बल्लभगढ़ के आंशिक क्षेत्र शामिल हैं। इस जोन में प्रतिदिन करीब 901 टन कचरा उठान का अनुमान है और इसमें 24 से 46 तक के 22 वार्ड शामिल किए गए हैं। वहीं वेस्ट जोन के लिए 282.11 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं जिसमें एनआईटी और आसपास के क्षेत्र आते हैं और यहां से प्रतिदिन लगभग 609 टन कचरा उठेगा। दोनों जोन में एजेंसियों को 5 साल का अनुबंध दिया जाएगा जिसे प्रदर्शन के आधार पर 9 साल तक बढ़ाया जा सकता है।
सख्त नियम के साथ रहेगा निगरानी तंत्र
निगम ने इस बार सफाई व्यवस्था को लेकर सख्त मानक तय किए हैं। एजेंसियों को काम शुरू होने के छह महीने के भीतर 50 प्रतिशत और एक साल के भीतर 100 प्रतिशत घरों से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग उठाना अनिवार्य होगा। सभी कचरा ढोने वाले वाहन सीएनजी या इलेक्ट्रिक होंगे और उन पर जीपीएस लगा होगा ताकि उनकी निगरानी की जा सके। कर्मचारियों की उपस्थिति बायोमेट्रिक मशीनों से दर्ज होगी। साथ ही शहर के गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट्स को 30 दिनों के भीतर खत्म करना एजेंसियों की जिम्मेदारी होगी और शिकायतों के समाधान के लिए अलग कंट्रोल सिस्टम भी विकसित किया जाएगा।
फिजिकल बिलिंग होगी पूरी तरह खत्म
भुगतान व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है, जिसमें अब फिजिकल बिलिंग खत्म कर दी गई है। सैनिटेशन पोर्टल के जरिए बिल स्वतः जनरेट होंगे। निगम हर महीने की 5 तारीख तक 50 प्रतिशत भुगतान बिना किसी जांच के जारी करेगा जबकि शेष 50 प्रतिशत राशि कार्य के सत्यापन के बाद दी जाएगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य भ्रष्टाचार और देरी को खत्म करना है। काम में लापरवाही पाए जाने पर भारी जुर्माना और अनुबंध समाप्त करने तक का प्रावधान रखा गया है।
बल्क वेस्ट जनरेटर के लिए तय किए गए मानक
बड़े स्तर पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों के लिए भी स्पष्ट मानक तय किए गए हैं। होटल और गेस्ट हाउस के लिए प्रति बेड प्रतिदिन 600 ग्राम कचरा, रेस्टोरेंट के लिए प्रति टेबल 2000 ग्राम, शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रति व्यक्ति 400 ग्राम और मैरिज हॉल या आयोजनों के लिए प्रति व्यक्ति 600 ग्राम कचरे का अनुमान निर्धारित किया गया है जिसके आधार पर प्रबंधन और निगरानी की जाएगी।
फरीदाबाद की स्वच्छता के लिए नगर निगम बड़े स्तर पर कई प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इस परियोजना को भी जल्द से जल्द शुरू करने का प्रयास है। - धीरेंद्र खड़गटा, निगम आयुक्त