नगर निगम ने वार्ड-44 के अंतर्गत आने वाले 10 गांवों में पुराने नालों पर लोहे की मजबूत जाली लगाने की परियोजना को मंजूरी दी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। जिले के ग्रामीण इलाकों और शहरी सीमा से सटे गांवों में लंबे समय से चली आ रही जलभराव और सड़क सुरक्षा की समस्या के समाधान की दिशा में नगर निगम ने एक अहम कदम उठाया है। निगम की तरफ से वार्ड-44 के अंतर्गत आने वाले 10 गांवों में पुराने नालों पर लोहे की मजबूत ग्रेटिंग (जाली) लगाने की परियोजना को मंजूरी दी है। इससे जल निकासी व्यवस्था ठीक होने के साथ हादसों पर भी रोक लगेगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर देखने में आता है कि सड़क को क्रॉस करते खुले नाले हादसों का कारण बनते हैं। बरसात के मौसम में इन नालों में कचरा, मिट्टी और प्लास्टिक फंस जाने से पानी की निकासी रुक जाती है, जिससे सड़कों पर जलभराव हो जाता है। इससे आवागमन बाधित होने के साथ दुपहिया वाहन चालकों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा भी बढ़ जाता है। नगर निगम की इस योजना से इन सभी समस्याओं पर ब्रेक लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
नगर निगम से मिली जानकारी के अनुसार यह परियोजना फरीदाबाद के डिवीजन-5 के अंतर्गत लाई गई है। इसके तहत वार्ड 44 में आने वाले साहूपुरा, मलेरणा, चंदावली, मच्छगढ़, सोतई, नवादा तिगांव, नीमका, नीमका फज्जुपुर और मुजेरी गांवों को शामिल किया गया है। इन सभी गांवों में उन स्थानों की पहचान की गई है, जहां नाले सड़क को क्रॉस करते हैं और जहां दुर्घटनाओं या जलभराव की आशंका सबसे अधिक रहती है। इन्हीं स्थानों पर लोहे की मजबूत ग्रेटिंग लगाई जाएगी।
निगम ने काम की गुणवत्ता और मजबूती को ध्यान में रखते हुए इसे पूरा करने के लिए करीब 10 महीने की समय सीमा तय की है। ताकि काम में किसी प्रकार की जल्दबाजी या लापरवाही न हो।
गुणवत्ता को लेकर सख्त निर्देश
नगर निगम ने गुणवत्ता को लेकर सख्त रुख अपनाया है। निगम की स्पष्ट किया गया है कि कार्य पीडब्ल्यूडी के वर्ष 1990 और 2021 के स्पेसिफिकेशन व मानकों के अनुसार ही किया जाएगा। ग्रेटिंग के लिए इस्तेमाल होने वाला लोहा उच्च गुणवत्ता का होना चाहिए ताकि भारी वाहनों के दबाव और लंबे समय तक उपयोग के बावजूद उसमें कोई टूट-फूट न हो। घटिया सामग्री या मानकों से समझौता करने पर एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने जताई खुशी
स्थानीय निवासियों के लिए यह परियोजना बड़ी राहत लेकर आई है। ग्रामीणों का कहना है कि खुले नालों में अक्सर पशु गिर जाते है जिससे पशु घायल होने के साथ नाले मलबा फंसने से नाले भी चोक हो जाते हैं। कई बार बच्चों और बुजुर्गों के फिसलकर गिरने की घटनाएं भी सामने आई हैं। ग्रेटिंग लगने से इन हादसों में कमी आएगी और बारिश के दौरान सड़कें लंबे समय तक जलमग्न नहीं रहेंगी।
लोगों के जीवन पर पड़ेगा सीधा प्रभाव
नगर निगम अधिकारियों का मानना है कि यह कार्य छोटे स्तर का दिख सकता है लेकिन इसका सीधा असर लोगों के दैनिक जीवन पर पड़ेगा। बेहतर जल निकासी से सड़कों की उम्र भी बढ़ेगी और बार-बार मरम्मत पर होने वाला खर्च कम होगा। साथ ही गांवों और शहर की सीमा पर बसे इलाकों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम साबित होगा।
निगम की तरफ से लोगों की सुविधाओं के लिए लगातार काम किया जा रहा है। जल्द ही इस परियोजना का काम भी पूरा कर लिया जाएगा। - डालचंद, कार्यकारी अभियंता नगर निगम