फेसबुक पेज के जरिए ढूंढते थे शिकार, दो कॉलर समेत तीन गिरफ्तार
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी करने वाले गिरोह का साइबर थाना एनआईटी पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने जयपुर निवासी अशोक जैन, विक्रम और पुष्पेंद्र को गिरफ्तार किया है।
पूछताछ में सामने आया कि अशोक गिरोह का मास्टरमाइंड था। वह पहले मर्चेंट नेवी में नौकरी कर चुका है और जयपुर में मर्चेंट नेवी के कोर्स की अकादमी भी चला चुका है। आरोपियों ने फेसबुक पर मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के नाम से पेज बना रखा था। पुलिस प्रवक्ता यशपाल के अनुसार, गांधी कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ने मर्चेंट नेवी में नौकरी के लिए डीजी की वेबसाइट पर दस्तावेज अपलोड किए थे। आठ अक्तूबर 2025 को उसके व्हॉट्सएप पर अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को कैप्टन बताया और कहा कि उसने उसके दस्तावेज देखे हैं। इसके बाद नौकरी दिलाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 2.80 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। रुपये लेने के बाद आरोपी ने रकम वापस नहीं की थी। शिकायत पर साइबर थाना एनआईटी में संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। आरोपियों ने फेसबुक पर मर्चेंट नेवी में नौकरी दिलाने के नाम से एक पेज बनाया हुआ था। कोई अभ्यर्थी पेज पर क्लिक करता था तो उसकी क्वेरी आरोपियों के व्हॉट्सएप पर पहुंच जाती थी। इसके बाद विक्रम और पुष्पेंद्र व्हॉट्सएप कॉल कर अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे। कॉलर खुद को मर्चेंट नेवी का अधिकारी या कैप्टन बताकर नौकरी दिलाने का झांसा देते थे।
मर्चेंट नेवी में नौकरी कर चुका है गिरोह का मास्टरमाइंड
पूछताछ में पुलिस को पता चला कि अशोक पहले मर्चेंट नेवी में नौकरी कर चुका है। उसने जयपुर में मर्चेंट नेवी के कोर्स के लिए अकादमी भी खोली थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात विक्रम और पुष्पेंद्र से हुई थी। पुलिस के अनुसार बाद में तीनों ने मिलकर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करना शुरू किया। विक्रम और पुष्पेंद्र कॉलर का काम करते थे, जबकि अशोक मास्टरमाइंड की भूमिका में था। पुलिस के अनुसार तीनों आरोपी स्नातक हैं। साइबर थाना एनआईटी पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद अदालत में पेश किया। अदालत ने अशोक को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया, जबकि विक्रम और पुष्पेंद्र को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, ठगी के लिए इस्तेमाल किए गए माध्यम और बैंक खातों के संबंध में पूछताछ की जाएगी।