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दो बार अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड मेले का उद्घाटन करने फरीदाबाद आए थे प्रणव मुखर्जी

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फरीदाबाद। देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के निधन पर शहर के लोगों ने भी उनके साथ बितायी अपनी यादें ताजा कीं। फरीदाबाद में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का भी वह दो बार उद्घाटन कर चुके हैं। एक बार वित्त मंत्री और दूसरी बार अपने राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का उद्घाटन किया था।
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सूरजकुंड मेला प्रभारी राजेश जून ने बताया कि 2 फरवरी वर्ष 2013 में पूर्व राष्ट्रपति ने 27वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड हस्तशिल्प मेले का उद्घाटन किया था। इससे पहले वह वित्तमंत्री रहते हुए भी मेले का उद्घाटन कर चुके हैं। इसके साथ ही मेले में न केवल उन्होंने कलाकारों की तारीफ की थी, बल्कि हरियाणा सरकार को ऐसे आयोजन करने पर बधाई भी दी थी। मेले के एक स्टॉल से उन्होंने राष्ट्रपति ने खरीदारी भी की थी।
थैलासीमियाग्रस्त बच्चों से की थी मुलाकात
थैलासीमिया ग्रस्त बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था फाउंडेशन अगेंस्ट थैलासीमिया के संचालक रविंद्र डुडेजा ने पूर्व राष्ट्रपति के साथ अपनी मुलाकात की यादों को साझा करते हुए बताया कि प्रणब मुखर्जी के निधन का समाचार सुनकर वह खुद और उनके थैलासीमिया ग्रस्त बच्चे काफी दुखी हुए हैं। उन्होंने बताया कि अपने राष्ट्रपति के कार्यकाल में प्रणब मुखर्जी हमेशा ही बच्चों को राष्ट्रपति भवन बुलाते थे। अपने हाथों से उन्हें चॉकलेट दिया करते थे। एक बार जब उनसे बताया गया कि इन बच्चों के रक्तदान के लिए उनकी संस्था बीस साल से काम कर रही है, तो वह यह सुनकर बहुत खुश हुए थे। साथ ही लोगों को रक्तदान के लिए प्रेरित करने को एक पोस्टर का उस दिन विमोचन भी किया था। वह हमेशा ही कहा करते थे, आप फूलों के गुलदस्ते न लाया करें। यह पैसा बच्चों के इलाज पर खर्च किया करे। रविंद्र डुडेजा ने बताया कि बच्चों को दिव्यांग श्रेणी में रखने ले लिए उनका बहुत बड़ा सहयोग रहा था।
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बीमार होने से करीब तीन माह पूर्व ही हुई थी मुलाकात
तिगांव से कांग्रेस के विधायक रहे ललित नागर ने अपनी याद साझा करते हुए बताया कि पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बीमार होने से तीन माह पूर्व ही वह उनसे उनके आवास पर मिले थे। इस दौरान बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी भी उनके साथ थीं। ललित नागर ने बताया कि तब वह बिलकुल भी बीमार नहीं थे और पूरी तरह से स्वस्थ थे। पूर्व विधायक ने बताया कि उनके पुत्र इंद्रजीत से भी उनके अच्छे संबंध हैं। राजनीति में कई बार पूर्व राष्ट्रपति ने उन्हें शिक्षा दी थी। आज उनके निधन की खबर सुनकर उन्हें काफी दुख हुआ है।
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