काम पर खर्च होंगे 8.37 करोड़, अवैध पार्किंग, कचरा डालने और लावारिस पशुओं पर लगेगी रोक
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर की सड़कों के किनारे बनी हरित पट्टियां अब खुले मैदान की तरह नहीं रहेंगी। इनमें वाहनों की पार्किंग, कचरा-मलबा डालने, अस्थायी कब्जे और लावारिस पशुओं के पहुंचने पर रोक लगाने के लिए फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) ने पांच प्रमुख ग्रीन बेल्ट को स्टील की मजबूत रेलिंग से सुरक्षित करने की योजना बनाई है। इस पर 8.37 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। करीब 8.40 लाख किलो स्टील से बनने वाली रेलिंग का काम शुरू होने के बाद सात महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
यह काम शहर के उन हिस्सों में किया जा रहा है जहां सड़क किनारे हरित क्षेत्र लगातार दबाव में हैं। परियोजना के तहत सेक्टर-37 से 65 तक विकसित किए जा रहे ग्रीन कॉरिडोर, सेक्टर-87 की ग्रीन बेल्ट तथा सेक्टर-14, 15, 16 और 17 से जुड़ी सड़क किनारे की हरित पट्टियों को सुरक्षित किया जाएगा। यानी ग्रेटर फरीदाबाद से लेकर पुराने सेक्टरों तक कई प्रमुख सड़क मार्गों के किनारे मौजूद हरित क्षेत्र इस योजना के दायरे में आएंगे।
जरूरी है ग्रीन बेल्ट की सुरक्षा
फरीदाबाद में तेजी से बढ़ते निर्माण और वाहनों की संख्या के बीच सड़क किनारे की जमीन पर लगातार दबाव बढ़ा है। कई जगह ग्रीन बेल्ट का इस्तेमाल पार्किंग, निर्माण सामग्री रखने, मिट्टी और मलबा डालने तथा छोटे स्तर की व्यावसायिक गतिविधियों के लिए होने लगता है। खुले हिस्सों से बेसहारा गाय और अन्य पशु भी हरित क्षेत्र में पहुंच जाते हैं। इससे पौधों को नुकसान पहुंचने के साथ मिट्टी भी खराब होती है। ऐसे में रेलिंग का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ग्रीन बेल्ट की जमीन को सड़क और आसपास की गतिविधियों से एक स्पष्ट सीमा मिल जाएगी। वाहनों को सीधे हरित क्षेत्र में ले जाना मुश्किल होगा। निर्माण सामग्री या मलबा डालने के लिए भी जगह का इस्तेमाल करना आसान नहीं रहेगा। पशुओं की आवाजाही पर भी काफी हद तक रोक लगेगी। हालांकि इसका असर तभी स्थायी होगा जब रेलिंग के साथ नियमित निगरानी और टूटे हिस्सों की समय पर मरम्मत की जाए।
प्रदूषण के लिहाज से भी अहम हैं ये हरित पट्टियां
फरीदाबाद में सड़क की धूल, वाहनों का धुआं, निर्माण एवं तोड़फोड़ की गतिविधियां और औद्योगिक उत्सर्जन वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के फरीदाबाद क्लीन एयर एक्शन प्लान में भी सड़क किनारे ग्रीन बफर विकसित करने और पार्कों, खुले स्थानों व अन्य क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने को प्रदूषण नियंत्रण के उपायों में शामिल किया गया है। सीपीसीबी की रिपोर्ट में फरीदाबाद में वाहनों के उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण एवं मलबा, उद्योग और खुले में कचरा जलाने को प्रदूषण के प्रमुख स्रोत बताया गया है। पुराने निगरानी आंकड़ों में शहर के कुछ स्थानों पर पीएम 2.5 का स्तर काफी ऊंचा दर्ज किया गया था।
8.40 लाख किलो स्टील से बनेगी सुरक्षा
परियोजना में बड़े पैमाने पर स्टील का इस्तेमाल होगा। एफएमडीए के अनुसार करीब 8.40 लाख किलो स्टील से रेलिंग, फ्रेम, गार्ड बार, ब्रैकेट और अन्य ढांचे तैयार किए जाएंगे। स्टील की सतह की सफाई के बाद उस पर दो कोट पेंट किया जाएगा, ताकि रेलिंग मौसम के असर से जल्दी खराब न हो। सड़क किनारे रेलिंग की दृश्यता बढ़ाने के लिए करीब 744 वर्ग मीटर हाई इंटेंसिटी माइक्रो प्रिजमैटिक रेट्रो-रिफ्लेक्टिव शीटिंग भी लगाई जाएगी। इससे रात के समय वाहन चालकों को रेलिंग दिखाई देने में मदद मिलेगी।
सिर्फ घेराबंदी नहीं, जमीन को भी व्यवस्थित किया जाएगा
काम के दौरान करीब 10,807 घन मीटर मिट्टी की खुदाई और 5,632.69 घन मीटर मिट्टी भराई का प्रावधान है। जहां जरूरत होगी वहां पुराने कंक्रीट को तोड़कर नया कंक्रीट भी डाला जाएगा। वास्तविक मात्रा साइट की स्थिति के अनुसार बदल सकती है। परियोजना सिर्फ रेलिंग खड़ी करने तक सीमित नहीं है कई जगह हरित पट्टी के किनारे की जमीन को व्यवस्थित करने का काम भी होगा। इससे बारिश के दौरान मिट्टी बहने और सड़क पर गंदगी आने जैसी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
इस परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है। इसपर काम किया जा रहा है जल्द जमीनी स्तर पर काम शुरू हो जाएगा । - विनय, कार्यकारी अभियंता एफएमडीए