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Faridabad News: अल-फलाह यूनिवर्सिटी में हुआ पहला सफल बम परीक्षण, फिर धौज की अरावली तक पहुंचा मॉड्यूल

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चार्जशीट में खुलासा: ट्यूबवेल के पास किया गया पहला परीक्षण, खेत में टेस्ट ब्लास्ट के बाद अरावली में टीएटीपी और हथियारों का परीक्षण
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अमर उजाला ब्यूरो

फरीदाबाद। लाल किला क्षेत्र में हुए कार विस्फोट मामले की जांच में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की चार्जशीट से फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में कथित आतंकी मॉड्यूल की गतिविधियों का सिलसिलेवार खुलासा हुआ है। जांच के मुताबिक, विस्फोटक तैयार करने और उनका परीक्षण करने की शुरुआत यूनिवर्सिटी परिसर से हुई। पहला सफल परीक्षण परिसर में ट्यूबवेल के पास किया गया। इसके बाद आरोपियों ने यूनिवर्सिटी से बाहर सुनसान खेत में टेस्ट ब्लास्ट किया और फिर गतिविधियों को धौज की अरावली के जंगलों तक ले गए। एनआईए के मुताबिक, यही मॉड्यूल बाद में अधिक मात्रा में आईईडी तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ा।


यूनिवर्सिटी में ट्यूबवेल के पास किया पहला सफल परीक्षण-

चार्जशीट के अनुसार, सितंबर-अक्तूबर 2024 में डॉ. उमर उन नबी, डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई और जासिर बिलाल वानी ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर में विस्फोटक मिश्रणों का परीक्षण किया। इनमें पहला सफल परीक्षण यूनिवर्सिटी के ट्यूबवेल के पास किया गया। इसके बाद विस्फोटक की क्षमता जांचने के लिए आरोपियों ने यूनिवर्सिटी परिसर के बाहर खेतों में कई प्रायोगिक परीक्षण (टेस्ट ब्लास्ट) किए। इन परीक्षणों में सामने आया कि टीएटीपी की बेहद मामूली मात्रा भी बड़े पैमाने पर तबाही फैला सकती है। इसके बाद आरोपियों ने सामान्य एनपीके उर्वरक (खाद) आधारित विस्फोटक बनाने का विचार छोड़ दिया। इसके बाद पूरी तरह से टीएटीपी के उत्पादन पर ध्यान केंद्रित कर लिया।
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एनआईए के मुताबिक, परीक्षण में इस्तेमाल विस्फोटक सामग्री गनाई के फ्लैट में तैयार की गई थी। यूनिवर्सिटी परिसर में किए गए इस परीक्षण के बाद आरोपियों का हौसला बढ़ा और उन्होंने प्रयोगों का दायरा परिसर से बाहर करना शुरू किया। चार्जशीट के मुताबिक, इसके बाद यूनिवर्सिटी के बाहर एक सुनसान खेत में टेस्ट ब्लास्ट किया गया।

खेत से धौज की अरावली तक पहुंची गतिविधियां-

जांच एजेंसी के मुताबिक, खेत में परीक्षण के बाद कथित मॉड्यूल ने फरीदाबाद की अरावली पहाड़ियों का रुख किया। धौज क्रशर जोन की ओर जंगलों में उमर उन नबी और मुजम्मिल गनाई द्वारा टीएटीपी के परीक्षण किए जाने का आरोप है। एनआईए ने एक परीक्षण में इस्तेमाल पाइप जैसी वस्तु के अवशेष बरामद होने का भी दावा किया है। चार्जशीट में दावा किया गया है कि शुरुआत में आरोपी उर्वरक आधारित विस्फोटकों के साथ प्रयोग कर रहे थे। परीक्षणों के बाद उन्होंने टीएटीपी की ओर रुख किया। इसके बाद कथित मॉड्यूल की गतिविधियां छोटे प्रयोगों से आगे बढ़कर आईईडी तैयार करने तक पहुंच गईं।

यूनिवर्सिटी के फ्लैट में भी चल रहे थे प्रयोग-

एनआईए की चार्जशीट में अल-फलाह यूनिवर्सिटी परिसर स्थित फ्लैट नंबर चार में भी टीएटीपी तैयार करने के प्रयोग किए जाने का उल्लेख है। जांच एजेंसी के अनुसार, नवंबर-दिसंबर 2024 के दौरान मुख्य आरोपी उमर उन नबी ने इस फ्लैट में प्रयोग किए। इसके लिए आवश्यक सामग्री स्थानीय बाजारों से जुटाए जाने का दावा है। जांच में यह भी सामने आया कि कथित मॉड्यूल ने रसायनों और अन्य सामान को लंबे समय तक यूनिवर्सिटी परिसर में रखा। बाद में इन्हें धौज और खोरी जमालपुर स्थित किराये के परिसरों में स्थानांतरित करने का आरोप है।

धौज में हथियारों का भी परीक्षण-

विस्फोटक परीक्षणों के साथ कथित मॉड्यूल की हथियारों को लेकर गतिविधियां भी धौज तक पहुंचीं। एनआईए के मुताबिक, अक्तूबर-नवंबर 2024 में डॉ. अदील अहमद राथर के अल-फलाह आने के दौरान धौज के एक अन्य जंगल क्षेत्र में हथियारों का परीक्षण किया गया। चार्जशीट के अनुसार, कथित मॉड्यूल के सदस्यों ने फरीदाबाद और गुरुग्राम के बाजारों से रसायन, उर्वरक, बिजली का सामान और अन्य सामग्री खरीदी थी। एनआईए का दावा है कि बाद में इस सामान को यूनिवर्सिटी के फ्लैटों से निकालकर धौज और खोरी जमालपुर के किराये के ठिकानों पर रखा गया।

2025 की शुरुआत तक कई आईईडी तैयार करने का आरोप-

जांच एजेंसी के अनुसार, जासिर बिलाल वानी ने कथित मॉड्यूल को तकनीकी मदद दी। वह अल-फलाह यूनिवर्सिटी आता-जाता था और सामग्री को किराये के ठिकानों तक पहुंचाने में मदद करता था। एनआईए का आरोप है कि 2025 की शुरुआत तक मॉड्यूल ने कई सूटकेस आधारित आईईडी तैयार कर लिए थे और उनमें से कुछ सामग्री धौज स्थित किराये के परिसर में स्थानांतरित कर दी गई थी।

फतेहपुर तगा से 2600 किलो अमोनियम नाइट्रेट बरामद-

जांच के दौरान फरीदाबाद के फतेहपुर तगा से करीब 2600 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट बरामद किए जाने की बात भी सामने आई। एनआईए के अनुसार, यह बरामदगी 9 नवंबर को हुई थी, यानी दिल्ली में हुए कार विस्फोट से एक दिन पहले। एजेंसी ने इसे कथित मॉड्यूल की बड़ी मात्रा में विस्फोटक जुटाने की गतिविधियों से जोड़ा है।
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यूनिवर्सिटी बनी गतिविधियों का शुरुआती केंद्र

एनआईए की चार्जशीट के अनुसार, उमर उन नबी का अल-फलाह यूनिवर्सिटी में काम करना कथित मॉड्यूल की गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण था। एजेंसी का दावा है कि यूनिवर्सिटी में रहते हुए उसे रसायनों, उर्वरकों, बिजली के उपकरणों और अन्य संसाधनों तक पहुंच मिली। जांच के मुताबिक, यहीं से कथित गतिविधियों की शुरुआत हुई और बाद में इसका दायरा यूनिवर्सिटी से निकलकर खेतों और धौज की अरावली तक पहुंच गया। एनआईए ने चार्जशीट में आरोप लगाया है कि कथित मॉड्यूल की गतिविधियां आगे चलकर बड़े पैमाने पर आईईडी तैयार करने और उन्हें इस्तेमाल करने की साजिश तक पहुंचीं।
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