धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी प्रभावित करता है अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। धान की कटाई का सीजन शुरू होने से पहले प्रशासन ने किसानों को पराली न जलाने की चेतावनी दी है। खेत में फसल अवशेष जलाने पर किसान पर जुर्माना लगाने के साथ ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा ’ पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज की जाएगी। वहीं, नियमानुसार एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी। प्रशासन का कहना है कि पराली जलाने से उठने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाने के साथ मिट्टी की उर्वरा शक्ति को भी प्रभावित करता है।
उपायुक्त आयुष सिन्हा ने किसानों से अपील की है कि पराली को आग लगाने के बजाय कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक विधियों से उसका प्रबंधन करें। इसके लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, मल्चर और रोटावेटर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इनसे फसल अवशेष खेत में ही मिल जाते हैं और मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है।
पराली जलाने पर भूमि के क्षेत्रफल के हिसाब से जुर्माने का प्रावधान है। दो एकड़ से कम भूमि पर पांच हजार, दो से पांच एकड़ तक दस हजार और पांच एकड़ से अधिक भूमि पर 30 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। प्रशासन की ओर से पराली जलाने की घटनाओं पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट डाटा और विभागीय फील्ड टीमों की मदद ली जाएगी। सहायक कृषि अभियंता राकेश कुमार ने किसानों से उपलब्ध कृषि मशीनरी और विभागीय मार्गदर्शन का लाभ उठाने की अपील की है। उपायुक्त ने किसानों से खुद पराली न जलाने के साथ आसपास के किसानों को भी इसके लिए जागरूक करने को कहा है।