फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में बसे गांव खोरी के लोग तोड़फोड़ के आदेश से डरे-सहमे हुए है। दो दिन पहले तक गलियों में इकट्ठी होने वाली भीड़ अब नजर नहीं आ रही है, लेकिन लोग कार्रवाई के डर से पूरे दिन घरों के बाहर बैठे दिखते हैं। अब लोगों को सरकार से एक ही आस है कि उनके आशियाना टूटने से किसी तरह बच जाएं। वहीं हालात इस कदर हैं कि मीडिया से बात करते समय लोगों के आंसू छलक पड़ते हैं।
गांव खोरी में करीब 10 हजार से अधिक मकान बने हुए है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे वन क्षेत्र बताते हुए सभी मकानों को तोड़ने के आदेश दिए है। 10 दिन पहले आए आदेश से लोगों की नींद उड़ी हुई है। जिला प्रशासन और नगर निगम ने गांव में तोड़फोड़ के लिए तैयारियां लगभग पूरी कर ली है। इससे लोगों में अपना आशियाना उजड़ने का डर और बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मीडिया में अपनी खुलकर बात रखना भी उन्हें भारी पड़ रहा है। अखबारों में फोटो छपने वाले लोगों को पुलिस उठाकर ले जाती है। इस कारण वह खुल कर अपनी बात तक नहीं रख सकते है। इन सबके बीच बृहस्पतिवार को जब अमर उजाला की टीम गांव में पहुंची तो प्रशासन की कार्रवाई से लोगों का दर्द एक बार फिर छलक उठा। घर के बाहर बैठी मूल रूप से बरेली की रहने वाली मालती देवी ने बताया कि करीब 20 साल पहले शादी के बाद यहां रहने आई थी। मेहनत-मजदूरी करके घर बनाया। एक लड़का दिव्यांग है। दूसरे की कोरोना की वजह से नौकरी छूट गई है। ऐसे में घर टूटा तो कहां जाएंगे। रोशनी देवी ने कहा कि सरकार और पुलिस उनके साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। लाखों रुपये देकर प्रॉपर्टी डीलर से जमीन खरीदी। सरकार को वोट देते है। इस गरीबी में किसी तरह बच्चों को पाल रहे हैं। लेकिन सरकार को यह रास नहीं आ रहा है। इसलिए हमारा बिजली पानी बंद कर दिया। आसमा खान ने बताया कि घर में बच्चे हैं। पति की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। मजदूरी करके परिवार पाल रही हैं। तोड़फोड़ के आदेश से नींद भी उड़ी हुई है।
आज हो सकती पंचायत
गांव खोरी में बुधवार को 72 वर्षीय बुजुर्ग द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या के बाद लोगों में भारी तनाव है। सूत्रों के अनुसार शुक्रवार को गांव वासियों ने इस मुद्दे पर पंचायत बुलाई है। इसमें लोगों की भारी भीड़ पहुंचने की संभावना है। हालांकि प्रशासन ने यहां धारा 144 लागू कर दी है।