हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट के जरिये सरकार देश-विदेश से निवेश लाने की कोशिशें कर रही हैं, लेकिन इस राह में कई अड़चनें बरकरार हैं। बृहस्पतिवार को किसानों ने चंदावली में महापंचायत का आयोजन किया।
इसके बाद मुआवजा नहीं मिलने से नाराज किसानों ने आईएमटी (इंडस्ट्रियल मॉडल टाउन) में एचएसआईआईडीसी के कार्यालयों पर ताले जड़ दिए। किसानों ने रविवार को आईएमटी में स्थित औद्योगिक इकाइयों पर भी ताले जड़ने की चेतावनी दी है।
किसानों का आरोप है कि एचएसआईआईडीसी पर उनका 1100 करोड़ रुपया बकाया है। लेकिन अधिकारी भुगतान करने में आनाकानी कर रहे हैं। बुधवार को अधिकारियों व किसानों के बीच वार्ता विफल रही, जिसके बाद बृहस्पतिवार को किसानों ने चंदावली में महापंचायत की। सुबह 10:30 बजे धरनास्थल पर किसानों की महापंचायत प्रसादीलाल नवादा की अध्यक्षता में शुरू हुई।
पंचायत में महिलाओं की अच्छी-खासी तादात देखी गई। किसानों के समर्थन में कांग्रेसी नेता भी पहुंचे हुए थे। कांग्रेसी नेताओं ने इस समस्या के लिए मनोहर सरकार को जिम्मेदार ठहराया और आंदोलन में सहयोग का आश्वासन दिया।
हालांकि, किसान नेता प्रवेश टोंगर ने आंदोलन को राजनीति से दूर रखने की बात कहते हुए समस्या के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार को ही जिम्मेदार ठहराया। दो घंटे चली महापंचायत के बाद कोर ग्रुप ने आईएमटी के उद्योगों पर तालाबंदी नहीं कर एचएसआईआईडीसी के कार्यालयों को बंद करने का निर्णय लिया।
पंचायत का इशारा होते ही किसानों ने दफ्तरों पर ताले जड़ने शुरू कर दिए। किसान संघर्ष समिति ने मांगे नहीं माने जाने पर रविवार को आईएमटी के उद्योगों पर तालाबंदी करने की चेतावनी दी है।
पुलिस बनी रही मूकदर्शक
दोपहर 12:30 बजे प्रदर्शनकारियों ने एचएसआईआईडीसी के कार्यालयों का रुख किया। यहां पहले से ही भारी पुलिसबल तैनात था। डीसीपी भूपेंद्र कुमार, एसीपी गजेंद्र शर्मा, एसीपी विष्णु दयाल पुलिस बल के साथ मोर्चा संभाले हुए थे, लेकिन प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया।
पुलिस खड़ी रही और प्रदर्शनकारी कार्यालयों पर ताले जड़ते रहे। हालांकि, इस दौरान पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास तो किया लेकिन नाकाम रहे। एचएसआईआईडीसी के कार्यकारी अभियंता एसएस भट्टी सहित सभी कार्यालयों के साथ स्टोर रूम भी बंद कर दिए।
आखिर क्यों उपज रहा विवाद
तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने नए उद्योग को स्थापित करने के लिए आईएमटी बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए चंदावली, नवादा, तिगांव, मुजैड़ी, मच्छगर, सोतई और ऊंचा गांव की 1832 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। तब विभाग ने किसानों को मुआवजा 16 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दिया था। किसानों ने मुआवजे को कम बताते 30 अगस्त 2009 में आइएमटी में ही धरना शुरू कर दिया।
यह धरना 10 मार्च 2010 तक चला। इस दौरान किसानों और प्रशासन के बीच एक समझौता हुआ। समझौते के अनुसार किसानों को 42 लाख रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देने पर सहमति बनी। पुनर्वास नीति के तहत रिहायशी प्लॉटों की साइट एचएसआईआईडीसी को तैयार करके देनी थी। इसके अलावा यहां लगने वाले उद्योगों में संबंधित गांवों के युवाओं को नौकरी प्राथमिकता पर देनी थी।
समझौते में 14 मांगें शामिल की र्गइं थी। समझौते के अनुसार प्रशासन ने तब मुआवजा तो 42 लाख रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से दे दिया। लेकिन विभाग ने हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार मुआवजा नहीं दिया है। मुआवजे के लिए किसान सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
प्रशासन के साथ हुए समझौते में आईएमटी में लगने वाली फैक्ट्रियों में स्थानीय युवाओं को नौकरी देने के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण की बात कही थी। लेकिन अब फैक्ट्री संचालक नौकरी देने से मना कर रहे हैं। -जसंवत सैनी, गांव चंदावली
हमारे परिवार की 10 एकड़ जमीन आइएमटी में अधिग्रहित हुई थी। लेकिन अभी तक एचएसआईआईडीसी आधा भी भुगतान नहीं कर पाया है। भुगतान नहीं होने के कारण सारे काम-धंधे चौपट हो गए।
-लेखराम, किसान चंदावली
हाईकोर्ट ने सितंबर 2014 में 1230 रुपये प्रति गज के हिसाब से मुआवजा देने के आदेश दिए। डेढ़ साल बीत जाने के बावजूद अभी तक मुआवजा नहीं मिला। किसान करें तो क्या करें।-महावीर शर्मा, मच्छगर
किसान कब तक मुआवजे का इंतजार करें। एचएसआईआईडीसी के अधिकारी सरकार को गुमराह कर रहे हैं। किसानों का गुस्सा जायज है। यदि अधिकारियों ने अपनी हठधार्मिता नहीं छोड़ी तो रविवार को किसान बड़ा आंदोलन करने पर बाध्य होंगे। -रामनिवास नागर, अध्यक्ष आईएमटी किसान संघर्ष समिति