फरीदाबाद में न हो इंदौर व छांयसा जैसी घटना, शुरू हुआ हाई-टेक गैस क्लोरीनेशन प्रोजेक्ट
फरीदाबाद में टर्बिडिटी और क्लोरीन की मात्रा को मापने के लिए लगेंगे ऑनलाइन सेंसर
6 सेक्टरों में होगा हाई-टेक गैस क्लोरीनेशन प्रोजेक्ट का काम
हजारों निवासियों को मिलेगा बैक्टीरिया मुक्त पेयजल
एक तरफ निगम व दूसरी तरफ पीएचईडी विभाग कर रहा काम अब एचएसवीपी ने भी कसी कमर
मोहित शुक्ला
फरीदाबाद। देश के अलग-अलग हिस्सों में दूषित पेयजल से जुड़े मामलों के बाद फरीदाबाद में जल आपूर्ति व्यवस्था को पूरी तरह सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं। नगर निगम और पीएचईडी विभाग की कार्रवाई के बीच अब हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) ने भी अपने अधीन सेक्टरों में हाई-टेक गैस क्लोरीनेशन प्रोजेक्ट शुरू कर दिया है। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से छह सेक्टरों के वाटर बूस्टिंग स्टेशनों और ट्यूबवेलों पर अत्याधुनिक सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।
परियोजना के तहत सेक्टर 56-56ए, सेक्टर-2, 56, 65 और सेक्टर-62 क्षेत्र को प्राथमिकता में लिया गया है। यहां पानी की टर्बिडिटी (गंदापन) और क्लोरीन स्तर को मापने के लिए ऑनलाइन सेंसर लगाए जाएंगे। पहली बार अत्याधुनिक ऑनलाइन एनालाइजर के जरिए पानी की गुणवत्ता की रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी। इससे सप्लाई से पहले ही यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पानी पूरी तरह बैक्टीरिया मुक्त है और क्लोरीन की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप है।
विशेषज्ञों के अनुसार अब तक अधिकतर स्थानों पर पानी की जांच सैंपल आधारित होती थी जिसमें समय लगता था। नई तकनीक से किसी भी गड़बड़ी की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी और आवश्यक सुधार तत्काल किया जा सकेगा। इससे हजारों परिवारों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा।
सुरक्षा का अभेद्य घेरा, रिसाव पर तुरंत नियंत्रण
गैसियस क्लोरीनेशन सिस्टम के साथ गैस ड्राई मीडिया स्क्रबर और ऑटोमैटिक शट-ऑफ वाल्व भी लगाए जाएंगे। यदि किसी कारण से गैस रिसाव की आशंका बनती है तो सिस्टम तुरंत उसे डिटेक्ट कर सोख लेगा और आपूर्ति स्वतः बंद कर देगा। घनी आबादी वाले सेक्टरों में यह सुरक्षा प्रावधान बेहद अहम माना जा रहा है।
परियोजना में तीन साल का मेंटेनेंस क्लॉज भी शामिल है। चयनित एजेंसी को काम पूरा होने के बाद तीन वर्ष तक रखरखाव और तकनीकी खामियों को दूर करने की जिम्मेदारी निभानी होगी। तीन माह के भीतर कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि गर्मी के मौसम में पानी की गुणवत्ता को लेकर कोई संकट न खड़ा हो।
गैस क्लोरीनेशन से स्वच्छ होगा जल
गैस क्लोरीनेशन पानी को बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीवों से मुक्त करने की प्रभावी प्रक्रिया है। इसमें नियंत्रित मात्रा में क्लोरीन गैस मिलाई जाती है जो पानी में मौजूद रोगाणुओं को नष्ट कर देती है। शहरी क्षेत्रों में पाइपलाइन नेटवर्क लंबा होने के कारण पानी में दोबारा संक्रमण की आशंका रहती है। ऐसे में क्लोरीन का संतुलित स्तर बनाए रखना जरूरी होता है। अधिक क्लोरीन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकती है,जबकि कम मात्रा प्रभावी कीटाणुनाशक नहीं बन पाती।
रियल-टाइम मॉनिटरिंग से होगा बदलाव
अब तक जल गुणवत्ता की जांच सैंपल लेकर लैब में की जाती थी जिसमें रिपोर्ट आने में समय लगता था। नई व्यवस्था में टर्बिडिटी और क्लोरीन स्तर की निगरानी 24 घंटे ऑनलाइन होगी। किसी भी स्तर पर मानक से विचलन होने पर सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। इससे अधिकारियों को मौके पर कार्रवाई करने में देरी नहीं होगी। साथ ही डेटा रिकॉर्ड होने से भविष्य की योजना और सुधार रणनीति तैयार करना भी आसान होगा। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मॉडल सफल रहा तो अन्य सेक्टरों और कॉलोनियों में भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।
एचएसवीपी के अधीन आने वाले सभी सेक्टरों में हाई-टेक गैस क्लोरीनेशन प्रोजेक्ट का काम होगा। पानी की स्वच्छता को प्राथमिकता पर रखकर प्राधिकरण हर स्तर पर काम कर रहा है। - संदीप दहिया, एसई एचएसवीपी