- 2031 तक पेयजल आपूर्ति का सिस्टम हुआ क्रैश, 10 वर्ष पहले ही शहरवासियों को मांग अनुसार नहीं मिल रहा पानी
- शहर में 450 एमएलडी की मांग पर 350 एमएलडी पानी की हो रही आपूर्ति
धनंजय चौहान
फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी में मास्टर प्लान 2031 के तहत पेयजल आपूर्ति बेहतर करने के लिए बनाया गया प्लान फेल साबित हो रहा है। मौजूदा समय में 450 एमएलडी पानी की मांग हैं जबकि आपूर्ति 350 एमएलडी ही हो रही है। आगामी छह वर्षों में डिमांड करीब 800 एमएलडी पहुंचने की उम्मीद है। वहीं, भीषण गर्मी में मांग-आपूर्ति में अंतर आने से 50 से अधिक इलाकों में पेयजल संकट शुरू हो गया है, जिससे लोग बेहद परेशान हैं। सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।
शहर में नगर निगम और फरीदाबाद महानगर विकास प्राधिकरण (एफएमडीए) मिलकर पानी की सप्लाई करते हैं। इसके लिए यमुना किनारे 22 रेनीवेल और अलग-अलग इलाकों में लगे 1700 ट्यूबवेल लगे हैं। इनसे रोजाना 350 एमएलडी पानी की सप्लाई होती है, जबकि मांग 450 एमएलडी है। इसकी पाइप लाइन जब यमुना से चलती है तो पूर्वी हिस्से के तमाम कॉलोनियों व सेक्टरों को पानी की सप्लाई करते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग पार कर एनआईटी की तरफ बढ़ती है। एनआईटी और बड़खल आखिरी छोर पर पड़ता है। इसलिए यहां पानी कम पहुंच पाता है, क्योंकि ज्यादातर पानी पूर्वी हिस्से में ही बंट जाता है। इसकी वजह से गर्मी बढ़ने के साथ एक बार फिर पानी की किल्लत शुरू हो गई है। कुछ इलाकों में
सप्ताह में मात्र एक दिन ही पानी आता है तो कई इलाकों में भू-जल स्तर नीचे जाने से ट्यूबवेलों का पानी भी लोगों को नियमित रूप से नहीं मिल रहा है।
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100 एमएलडी का पानी का अंतर लोगों के लिए बन रहा मुसीबत
मई में पानी की मांग में जबरदस्त उछाल आया है। इस समय मांग ज्यादा और आपूर्ति कम है। इसकी वजह से कई कॉलोनियों और सेक्टरों की पानी सप्लाई में कटौती की जा रही है। निगम अधिकारियों के अनुसार फरीदाबाद में इस समय रोजाना पानी की मांग करीब 450 से 460 एमएलडी है, जबकि निगम और एफएमडीए मिलकर 330 से 350 एमएलडी ही पानी सप्लाई कर पा रहे हैं। 100 एमएलडी का ये मार्जिन लोगों के लिए मुसीबत पैदा कर रहा है।
सरकारी टैंकरों की सप्लाई बंद, प्राइवेट की चांदी
शहर में पेयजल की समस्या को देखते हुए पांच वर्ष पहले नगर निगम की ओर से सरकारी टैंकरों से पानी सप्लाई किया जाता था, जिन इलाकों में समस्या ज्यादा रहती थी। उन क्षेत्रों में 4 से 5 टैंकर भेजे जाते थे। कुछ समय बाद निगम की ओर से सरकारी टैंकरों की सुविधा बंद कर दी गई, जिसका प्राइवेट टैंकर संचालक लाभ उठाने लगे। हाल ये हैं कि सुबह 5 बजे से सेक्टर व कॉलोनियों में टैंकर पहुंचना शुरू हो जाते हैं। लोगों को करीब 1200 रुपये देकर टैंकर मंगाना पड़ रहा है।
पेयजल परियोजना पर अब तक करीब 800 करोड़ खर्च, फिर भी नहीं बुझी लोगों की प्यास
शहर में पिछले 15 वर्षों में कुछ नए सेक्टर बसे तो कई कॉलोनियों को वैध किया गया। इन कॉलोनियों में पेयजल व्यवस्था के लिए नगर निगम ने योजना तैयार की है। जो सेक्टर और कॉलोनियां पहले से बसी हैं। उनमें 11 वर्ष पहले जवाहर लाल नेहरू अर्बन रिन्यूअल मिशन (जेएनएनयूआरएम) के तहत लगभग 493.49 करोड़ रुपये की लागत से योजना बनाई गई थी। हालांकि फिर भी पेयजल समस्या का कोई समाधान नहीं हुआ। कुछ वर्ष पहले अटल नवीनीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन अमृत योजना के तहत करीब 100 करोड़ रुपये की लागत से पेयजल आपूर्ति की योजना बनाई है। वहीं, पांच वर्षों में एफएमडीए की ओर से पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए। सेक्टर-22, 23 और लकड़पुर में वर्षों पहले बने अंडरग्राउंड बूस्टर को दोबारा चालू करने के लिए 25 लाख रुपये की लागत से नई पाइल लाइन बिछाई गई। कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा का दावा था कि दोनों क्षेत्र में पानी की समस्या बिल्कुल खत्म हो जाएगी लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। एनआईटी क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए रेनीवैल नंबर दो, 10 और मंझावली की करीब 50 लाख रुपये की लागत से सफाई कराई गई। इसका भी कोई खास लाभ नहीं मिला। बल्लभगढ़ से गांव छायंसा स्थित 10 नंबर ट्यूबवेल तक करीब चार करोड़ रुपये की लागत से नई पाइप लाइन बिछाई गई। स्मार्ट सिटी लिमिटेड कंपनी की ओर से शहर में पेयजल आपूर्ति सुधार के लिए करोड़ों रुपये की स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एक्विजिशन) शुरू की गई। कैबिनेट मंत्री मूलचंद शर्मा का दावा था कि उनके विभाग सभा में 40 हजार लोगों को पानी की समस्या से राहत मिलेगी लेकिन, विधानसभा के अंतर्गत आने वाले सेक्टर-55 और 22, 23 में आज भी सप्ताह में मात्र एक दिन लोगों को पानी मिल रहा है।
इन क्षेत्रों में समस्या ज्यादा
एनआईटी और बड़खल क्षेत्र में पानी की किल्ल्त सबसे अधिक है। सेक्टर-25 जलघर से पानी सेक्टर-55, 22, 23, संजय कॉलोनी, प्रतापगढ़, एसजीएम नगर, सैनिक कॉलोनी, जीवन नगर, राजीव कॉलोनी तक जाता है, लेकिन इस बूस्टर में पानी इतना कम आता है कि सभी इलाकों में तीन दिन में एक बार पानी की सप्लाई होती है। इसके अलावा जवाहर कॉलोनी, पर्वतिया कॉलोनी, नंगला पार्ट दो, सरपंच चौक, भड़ाना चौक, सुभाष चौक सैनिक कॉलोनी, ग्रीन फील्ड कॉलोनी आदि इलाकों में लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं।
मास्टर प्लान 2031 पर फोकस कर रहे काम
मास्टर प्लान के तहत वर्ष 2031 तक शहर में करीब 750 एमएलटी पानी की जरूरत होगी। इसके लिए यमुना किनारे 12 रैनीवेल लगाए जा रहे हैं। दो वर्ष में काम पूरा हो जाएगा। इसके अलावा री-यूज शोधित पानी को घरों में सप्लाई करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। साथ ही शहर ट्यूबवेलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। - विशाल बंसल, मुख्य अभियंता, एफएमडीए