अगल युद्ध लंबर चला तो कच्चे माल की कीमतों में आएगा उछाल
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा भड़क उठी जंग ने जिले के उद्यमियों की परेशानी बढ़ा दी है। अगर यह युद्ध लंबा चलता है तो जिले की लगभग 10 से 15 प्रतिशत इकाइयों के निर्यात पर बेहद बुरा असर पड़ेगा। फरीदाबाद से भारी मात्रा में तैयार माल मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के देशों में भेजा जाता है।
जब पहली बार दोनों देशों में तनाव शुरू हुआ था, तब भी स्थानीय उद्यमियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, पिछले कुछ समय से हालात सुधर रहे थे और व्यापार पटरी पर लौट रहा था, लेकिन दोबारा शुरू हुए इस युद्ध ने उद्यमियों को बड़ा झटका दिया है।
जिले के औद्योगिक संगठनों का कहना है कि प्रत्यक्ष रूप से भले ही 10 से 15 फीसदी इकाइयां सीधे मिडिल ईस्ट से व्यापार करती हैं, लेकिन इस युद्ध का अप्रत्यक्ष असर जिले की सभी 30 हजार छोटी-बड़ी इकाइयों पर पड़ेगा। युद्ध लंबा चलने की स्थिति में कच्चे माल (खासकर कच्चा तेल और स्टील) के दाम फिर से बढ़ने लगेंगे।
माल ढुलाई (फ्रेट चार्ज) और लॉजिस्टिक्स का खर्च बढ़ने से उत्पादन लागत आसमान छूने लगेगी और प्लास्टिक के दाने के दामों में भी भारी इजाफा होने की उम्मीद है। जिससे मंदी के दौर में उद्योगों को चलाना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
उद्यमियों से बातचीत
मिडिल ईस्ट हमारा बड़ा बाजार है। युद्ध से सप्लाई चेन पूरी तरह टूट जाएगी। अगर कच्चे माल के दाम दोबारा रोज बढ़ने लगे, तो उद्योगों को चलाना नामुमकिन हो जाएगा।-पवन, उद्यमी
अभी बाजार संभलना शुरू ही हुआ था कि यह नया संकट आ गया। शिपिंग कंटेनर्स के दाम बढ़ने और डिलीवरी में देरी से उद्यमियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।-श्याम सुंदर कपूर, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ऑल इंडिया फोरम ऑफ एमएसएमई
हमारा कार्य बहुत ज्यादा निर्यात का नहीं है, पर हमारे जो ग्राहक हैं वह बहुत हद तक निर्यात पर ही निर्भर हैं। ऐसे में अगर उनका निर्यात कम होता है तो हमारे ऑर्डर पर भी प्रभाव पड़ेगा।-प्रभाकर शुक्ला, उद्यमी
इस संकट का सबसे ज्यादा असर एमएसएमई सेक्टर पर पड़ेगा। सरकार को माल ढुलाई और कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए तुरंत कदम उठाने चाहिए।-डीके मिश्रा, उद्यमी