गवाहों के पलटने व आपसी समझौते के बाद हाईकोर्ट ने रद्द की प्राथमिकी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। खेड़ीपुल थाना क्षेत्र में जानलेवा हमले के मामले में घायल युवक और उसकी मां के अभियोजन के समर्थन में बयान नहीं देने के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि मुकदमा आगे चलाना निरर्थक होगा। दोनों पक्षों में समझौता होने और मुख्य गवाहों के मुकरने के आधार पर हाईकोर्ट ने सात अगस्त को रवि और विजय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी व उससे जुड़ी सभी आगामी कार्यवाही रद्द कर दी।
हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद 27 अगस्त को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार की अदालत ने मामले की कार्यवाही समाप्त कर दी। मामले में सत्यम सिंह की शिकायत पर 22 दिसंबर 2022 को खेड़ीपुल थाने में रवि और विजय के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत भारतीय दंड संहिता की धारा 307, 323, 325, 506 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज हुई थी। शिकायत के अनुसार 4 नवंबर 2022 की रात दोनों भाई सत्यम को शराब पिलाने के बहाने राधाकृष्ण मंदिर के पास ले गए थे। वहां विजय ने उसके सिर पर किसी वस्तु से वार किया और रवि ने उसे जमीन पर गिराकर पत्थर से चेहरे पर हमला किया था। गंभीर हालत में सत्यम को दिल्ली के ट्रॉमा सेंटर भेजा गया था। पुलिस ने दोनों को 26 जनवरी 2023 को गिरफ्तार किया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान 3 जून 2023 को सत्यम सिंह ने अभियोजन की कहानी का समर्थन नहीं किया। उसने अदालत में कहा कि वह दोस्तों के साथ शराब पी रहा था और पत्थरों पर गिरने से उसके चेहरे पर चोट लगी थी। उसने रवि और विजय पर हमला करने का आरोप भी नकार दिया। उसकी मां शशि ने भी अभियोजन का समर्थन नहीं किया। उसे पक्षद्रोही घोषित कर सरकारी वकील ने जिरह की, लेकिन वह अपने पहले के आरोपों पर कायम नहीं रही। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दोनों प्रमुख गवाहों के पलटने के बाद दोषी ठहराए जाने की संभावना नहीं है। ऐसे में मुकदमा जारी रखना समय की बर्बादी और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।