संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नवंबर में सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला की परिभाषा में किए गए बदलाव को लेकर अब बड़ा फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही पुराने आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले पहाड़ों को ही अरावली का हिस्सा मानने की बात कही गई थी। अदालत के इस नए आदेश से अरावली क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को लेकर चल रही चिंताओं को काफी हद तक राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का शहर के पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने स्वागत किया है। सेव अरावली ट्रस्ट सहित कई पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसे अरावली संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताया है। उनका कहना है कि इस फैसले से अरावली क्षेत्र में अंधाधुंध खनन और निर्माण गतिविधियों पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी।
सेव अरावली संस्था के सदस्य कैलाश ने बताया कि जब नवंबर में सुप्रीम कोर्ट का पहला फैसला आया था, उस समय आम लोगों में इस विषय को लेकर ज्यादा जागरूकता नहीं थी। हालांकि बीते कुछ समय में लोगों ने अरावली पर्वतमाला के पर्यावरणीय महत्व को समझा और इसके संरक्षण के लिए एकजुट होकर आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि अरावली सिर्फ पहाड़ों की शृंखला नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता के लिए बेहद जरूरी है।
कैलाश ने कहा कि सेव अरावली ट्रस्ट समेत कई संगठनों और आम नागरिकों ने मिलकर अरावली को बचाने के लिए अभियान चलाया। सोशल मीडिया, जनसभाओं और ज्ञापन के माध्यम से लोगों ने अपनी बात मजबूती से रखी। इसी जन जागरूकता और सामूहिक प्रयास का नतीजा है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले फैसले पर रोक लगाई है। वहीं पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि यह फैसला भविष्य में अरावली क्षेत्र को बेहतर तरीके से संरक्षित करने में सहायक साबित होगा।