एचईआरसी की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट तत्काल रद्द करने की कर रहे मांग बिजली कर्मचारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने की तैयारी के विरोध में हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने संघर्ष का विगुल फूंक दिया है। मोर्चा ने हरियाणा विद्युत नियामक आयोग (एचईआरसी) की विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट तत्काल रद्द करने की मांग की है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि लाइसेंस जारी हुआ तो प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जा सकते हैं।
मोर्चा के प्रवक्ता रविंद्र घनघस ने आरोप लगाया कि निजी कंपनी का उद्देश्य बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं, मॉल, व्यावसायिक परिसरों और बड़ी आवासीय सोसाइटियों जैसे अधिक मुनाफे वाले उपभोक्ताओं को बिजली देना है। इससे दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएनएल) के राजस्व में कमी आएगी। कर्मचारियों का कहना है कि सरकारी निगम पर किसानों, ग्रामीण और घरेलू उपभोक्ताओं का भार बढ़ेगा और भविष्य में बिजली महंगी होने का खतरा रहेगा।
मोर्चा के अनुसार गुरुग्राम और नूंह में सभी उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध कराने के लिए करीब 18 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है, जबकि निजी कंपनी की पांच वर्षीय योजना में 15 सौ करोड़ रुपये से भी कम निवेश का प्रस्ताव है। संगठन ने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था लाभ वाले उपभोक्ताओं को चुनने तक सीमित रह सकती है। मोर्चा ने किसान संगठनों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम उपभोक्ताओं से निजीकरण के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की है।