कर्मचारी संगठनों ने सीटीएम को प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
कर्मचारियों ने दूसरे दिन भी महापड़ाव में बढ़-चढ़कर लिया भाग
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। ज्वाइंट ट्रेड यूनियन काउंसिल का लघु सचिवालय के सामने महापड़ाव बृहस्पतिवार को दूसरे दिन केंद्र और राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारी नारे लगाते हुए उपायुक्त कार्यालय के सामने पहुंचे और प्रधानमंत्री के नाम 15 सूत्री मांगों का ज्ञापन सीटीएम (नगराधीश) अमित मान को सौंपा। ज्ञापन में लिखा गया है कि जब तक सरकार मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स रद्द नहीं करेगी, तब तक आंदोलन चलता रहेगा।
धरने की अध्यक्षता एटक के विशमंबर, इंटक के हुकमचंद वैनीवाल, सर्व कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष करतार सिंह जागलान व सीटू के निरंतर पराशर ने संयुक्त रूप से की। जबकि, संचालन कन्वीनर वीरेंद्र सिंह डंगवाल ने किया। महापड़ाव के आरंभ में केंद्र और राज्य सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कन्वीनर निरंतर पराशर ने बताया कि पूरे प्रदेश में हजारों की संख्या में मजदूरों और कर्मचारियों ने जिला मुख्यालयों में महापड़ाव डाला है ताकि केंद्र सरकार महापड़ाव के मुद्दों पर गंभीरता से विचार करके समस्याओं का समाधान करने की पहल करे। एटक के आरएन सिंह, हुकमचंद वैनीवाल, कृपाराम शर्मा व कामरेड जवाहरलाल ने बताया कि जब तक सरकार मजदूर विरोधी चारों लेबर कोड्स रद्द नहीं करती तब तक आंदोलन लगातार जारी रहेगा। उनका कहना हैं कि सरकार ने कंपनी मालिकों को मजदूरों का शोषण करने की खुली छूट दे रखी है। श्रम विभाग के अधिकारी मजदूरों की समस्याओं का समाधान करने में अपने आप को अक्षम बताते हैं। नेताओं ने बताया कि यह अजीब विडंबना है। कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दिल्ली के मजदूरों को 18000 रुपया न्यूनतम वेतन मिलता है। जबकि, फरीदाबाद में केवल दस हजार रुपये न्यूनतम वेतन के रूप में मिलते हैं। दिल्ली और फरीदाबाद में वेतनमान में भारी अंतर है। राज्य सरकार को इस अंतर को समाप्त करना चाहिए। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने न्यूनतम वेतन 26 हजार रुपए संशोधित करने, सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, परियोजना कर्मियों सहित सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को रेगुलर करने, बेरोजगार युवकों को रोजगार देने, सरकारी विभागों में रिक्त पड़ी पदों को भरने, ठेका प्रथा को समाप्त करने समान काम समान वेतन लागू करने, कर्मचारियों की सेवा पर आधारित पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल करने, महंगाई पर रोक लगाने, बिजली बिल 2023 को वापस लेने, मणिपुर, मेवात सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रही सांप्रदायिक और जातीय हिंसा पर रोक लगाने शांति सद्भाव और आपसी भाईचारा कायम करने की मांग की है। संयुक्त ट्रेड यूनियन काउंसिल ने आशा वर्करों की हड़ताल का पूर्ण रूप से समर्थन करते हुए सरकार से हठधर्मिता का रास्ता छोड़कर उनकी मांगों को लागू करने का अनुरोध किया। राकेश चंडालिया, मुकेश वैनीवाल, वीरेंद्र सरोत, देवेंद्र डागर, वीरेंद्र शर्मा व सुभाष बिधूड़ी आदि ने भी संबोधित किया।