अदालत ने कहा, यह मामला अत्यंत विरल श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र सिंह की अदालत ने सागरपुर निवासी सेवानिवृत्त न्यायालय कर्मी के बेटे राहुल की हत्या के मामले में फैसला सुनाते हुए आठों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यह मामला अत्यंत विरल श्रेणी में नहीं आता, इसलिए मृत्युदंड देने का आधार नहीं बनता। अदालत ने अपने आदेश में हितेश उर्फ हरिओम, प्रताप, अमन, आशीष, सागर, सचिन, हर्ष उर्फ हर्षु और दीपक को भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश), 148 (घातक हथियार के साथ दंगा करना), 302 (हत्या), 149 (गैरकानूनी जनसमूह का सदस्य होना) व धारा 506 (जान से मारने की धमकी) के तहत दोषी ठहराया था। इसके अलावा आरोपी प्रताप को आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत भी दोषी माना गया। वहीं आरोपी सचिन को एक धारा 201 (सबूतों को मिटाने) आईपीसी के आरोप से बरी किया गया था।
अभियोजन के अनुसार दो जनवरी 2022 को पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने एकजुट होकर सेवानिवृत्त न्यायालय कर्मी के बेटे राहुल को घेर लिया और उस पर हमला कर दिया। हमले के दौरान हथियारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे युवक को गंभीर चोटें आईं और उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच की और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया।
करीब तीन वर्ष आठ माह तक चली सुनवाई के बाद 16 फरवरी 2026 को अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी ठहराया। इसके बाद 18 फरवरी को सजा पर निर्णय सुनाया गया। सजा के दौरान दोषियों ने स्वयं को गरीब बताते हुए परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला दिया, किंतु अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर दंड सुनाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि दंड प्रक्रिया संहिता के अनुसार मृत्युदंड केवल अत्यंत विरल मामलों में दिया जाता है। इस मामले की परिस्थितियों, दोषियों की आयु और उनके पूर्व आपराधिक इतिहास को ध्यान में रखते हुए आजीवन कारावास को पर्याप्त सजा माना गया।
अदालत ने प्रताप पचास हजार, हितेश उर्फ हरिओम पर 45 हजार, दीपक, सागर, हर्ष उर्फ हर्षु, सचिन, आशीष और अमन पर भी प्रत्येक पर 45 हजार रुपये का हर्जाना लगाया गया है। अदालत ने आदेश दिया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी व विचाराधीन अवधि का लाभ दिया जाएगा। यदि निर्धारित हर्जाना जमा नहीं कराया गया तो दोषियों को अतिरिक्त कठोर कारावास भुगतना होगा।