- महिलाओं-बच्चों ने जमकर की खरीदारी, घरों में बनेंगी सेवइयां और पकवान
संवाद न्यूज एजेंसी
बल्लभगढ़। जिले में बुधवार को माहे रमजान का आखिरी रोजा रखा गया। बृहस्पतिवार को समुदाय के लोग ईद मनाएंगे। सभी मस्जिदों में ईद की नमाज अदा की जाएगी। गर्मी के चलते नमाज का समय सुबह सवा आठ बजे से 9 बजे तक अधिकतर मस्जिदों में रखा गया है। जिले में करीब 114 मस्जिदें हैं। एक दिन पहले मुस्लिम समाज के लोगों ने बाजारों में कपड़े और अन्य वस्तुओं की खरीददारी की। दूसरी तरफ, महिलाओं ने घरों में शाम से ही सेवइयां और अन्य पकवानों की तैयारी करके रख ली थी।
मुस्लिम समाज का बुधवार को 30वां रोजा था। आज बृहस्पतिवार को मुस्लिम समुदाय के लोग ईद उल फितर मनाएंगे। हालांकि, 29वें रोजे को चांद नहीं दिखा, इसलिए 30 रोजे पूरे हुए हैं। ईद की तैयारियों को लेकर बाजार में जबरदस्त भीड़ देखने को मिली। ऊंचा गांव स्थित जामा मस्जिद के मौलाना जमालुद्दीन ने बताया कि जिले में करीब 114 मस्जिदों में 60 हजार से अधिक लोग ईद की नमाज अदा करेंगे। मस्जिदों में ईद की नमाज की विशेष तैयारियां की गईं हैं, साफ-सफाई कराकर वुजू के पानी का भी इंतजाम कराया गया है।
मस्जिदों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिसकर्मियों की तैनाती होगी। ईद के लिए शहर की मस्जिदों को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। गर्मी की वजह से ठंडे पानी, हवा के कूलर और धूप से बचाव के लिए टैंट का इंतजाम किया गया है। वहीं, पार्किंग आदि की भी बेहतर सुविधा दी जाएगी। ईद को लेकर कमेटी बनाई गई है, जिसमें हिंदू-मुस्लिम दोनों समाज के लोग शामिल हैं।
मीठी सेवई बनाने की परंपरा
ईद पर एक-दूसरे को मुबारकबाद देने के साथ-साथ एक दूसरे का मुंह भी मीठा करवाया जाता है। ईद उल फितर पर मुस्लिम समुदाय के लोग खासतौर पर सेवई बनाते हैं। ये परंपरा कई सालों से चली आ रही है। सेवई में काफी मात्रा में ड्राई फ्रूट्स डाले जाते हैं। इन दिनों ड्राई फ्रूट्स के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। खासकर चिरौंजी के दाम 2400 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। सेवइयों में चिरौंजी का इस्तेमाल अधिक होता है।
बच्चों में बहुत उत्साह
ईद को लेकर बाजारों में महिलाओं के साथ-साथ बच्चे भी खरीदारी करते हुए नजर आए। महिलाएं अपनी पोशाक के साथ मैचिंग के दुपट्टे, ज्वेलरी, चूड़ियां, चप्पल, कॉस्मेटिक आदि की खरीदी करती दिखीं तो वहीं बच्चे भी नए कपड़े खरीदकर खुश होते दिखे। ओल्ड फरीदाबाद स्थित बराही तालाब के पास सेवई की दुकान लगी रही। वहीं, एनआईटी एक, बल्लभगढ़ आदि बाजारों में अच्छी- खासी चहल-पहल देखने को मिली।
फितरा निकालकर गरीबों में बांटा
ईद उल फितर में फितर का मतबल फितरे से है। ईद से पहले इस्लाम धर्म में फितरा निकालने की भी परंपरा होती है। इसमें मुसलमान अपने घरों में सालभर खाये जाने वाले अनाज में से कुछ हिस्सा गरीबों के लिए निकालते हैं। इसके साथ ही रुपये-पैसे भी फितरा के तौर पर दिए जाते हैं। अन्य सामान भी इसमें शामिल होता है। ईद से एक दिन पहले आसपास के गरीब लोगों में बांट दिया जाता है, ताकि गरीब लोग भी अपने बच्चों के कपड़ों आदि की खरीदारी कर सकें।
बच्चों को मिलेगी ईदी
मुस्लिम समुदाय में ईदी देने की भी विशेष परंपरा है। मस्जिदों में ईद की नमाज के बाद लोग एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। इसके बाद बड़े-बुजुर्ग बच्चों को ईदी बांटते हैं। ईदी में मिले पैसे लेकर बच्चे मेला आदि घूमने जाते हैं। घरों में भी रिश्तेदार ईद पर मिलने पहुंचते हैं, जो बच्चों को ईदी के रुपये देकर जाते हैं।