साइबर ठगी के नए तरीकों को लेकर झारखंड का जामताड़ा एक बार फिर सुर्खियों में है। स्थानीय साइबर अपराध शाखा ने ई-सिम फिशिंग गिरोह का भंडाफोड़ कर 5 साइबर ठगों को गिरफ्तार किया है। ये आईफोन पर ई-सिम एक्टीवेट कराने का झांसा देकर लोगों के बैंक खाते खाली कर देते थे। इनमें से चार 19 अगस्त को झारखंड के जामताड़ा और पांचवां 20 अगस्त को पंजाब के जालंधर से दबोचा गया था।
रिमांड के दौरान पूछताछ में इन्होंने जामताड़ा और पंजाब से चल रही नई तरह की साइबर ठगी की करतूतों का खुलासा किया। इनमें से अजय मंडल जामताड़ा, भरत मंडल, शुत्रुघ्न मंडल व नरेंद्र मंडल उर्फ लालू मधुपुर देवघर, झारखंड के रहने वाले हैं। पांचवां ठग सौरभ जालंधर, पंजाब का निवासी है। इनकी निशानदेही पर 12 लैपटॉप, 16 मोबाइल फोन, 16 सिम, सवा लाख रुपये की नकदी बरामद की गई है।
पुलिस आयुक्त ओपी सिंह ने बताया कि ये ठग पंजाब, हरियाणा, बिहार, पश्चिम बंगाल और झारखंड में 300 से अधिक बैंक खातों के अलावा ई-वॉलेट और अन्य माध्यमों से पैसे चुरा चुके हैं। ऑनलाइन ठगी के लिए ये काफी संख्या में मोबाइल सिम जमा कर लेते और उनका उपयोग अलग-अलग बैंकों खातों के लिए करते थे। ये लोग आईफोन में ई-सिम को अपग्रेड करने या केवाईसी अपडेट के नाम पर मोबाइल कंपनी के प्रतिनिधि बनकर फोन करते और लोगों को उनके सिम 3जी से 4जी में अपग्रेड करने का झांसा देते।
इस साल जुलाई में ठगों ने फरीदाबाद के सूरजकुंड क्षेत्र के चार्मवुड विलेज निवासी मनीष जैन को फंसाकर उनके खाते से 2.30 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए थे। इस मामले की जांच के दौरान फरीदाबाद पुलिस की एक टीम जामताड़ा भेजी गई। सर्विलांस के आधार पर वहां से अजय, भरत, शत्रुघ्न और नरेंद्र को दबोचा गया। इन्होंने पूछताछ में जालंधर के सौरभ का पता बताया। बुधवार को रिमांड अवधि समाप्त होने पर इन्हें फिर से कोर्ट में पेश किया गया। वहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में नीमका जेल भेज दिया गया।
यह तरीका अपनाते थे साइबर ठग
यह वर्चुअल मोबाइल सिम है, जिसे ई-सिम नाम दिया गया है। यह आईफोन और वन प्लस मोबाइल के कुछ चुनिंदा मॉडल में ही इस्तेमाल होता है। एप्पल कंपनी ने अपने नए मॉडल आईफोन 10, आईफोन 11 व 11 प्रो में इसकी सुविधा दी है। एप्पल जैसे महंगे फोन इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति के खाते में रकम भी ज्यादा होगी, इसलिए जामताड़ा में बैठे साइबर ठगों ने उन्हें निशाना बनाया।
वे उन्हें एसएमएस भेजकर पुराना सिम अपग्रेड कर ई-सिम में बदलने का झांसा देते थे। वे उन्हें एक एसएमएस भेजते और उसे मोबाइल कंपनी के कस्टमर केयर में भेजने के लिए कहते थे। उस एसएमएस में ई-मेल आईडी ठगों की होती थी। लोग उसे मोबाइल कंपनी के कस्टर केयर में भेजते तो वह रजिस्टर हो जाती थी।
इसके बाद ई-मेल के जरिये पीड़ित के ई-सिम का क्यूआर कोड जामताड़ा में बैठे ठगों के पास पहुंच जाता। इसे स्कैन करके वे अपने ब्लैंक सिम में लोड कर लेते थे। उधर, ई-सिम एक्टीवेट होने तक पुराना सिम 24 घंटे के लिए बंद हो जाता था। तब तक उस मोबाइल सिम से जुड़े सभी बैंक खातों को ठग खाली कर देते थे, क्योंकि उसका ओटीपी भी नए सिम में ही आता। उधर, सिम बंद होने के कारण खाताधारक के पास बैंक से रकम निकलने के मैसेज भी नहीं पहुंच जाते। जब तक खाताधारक को इस ठगी का पता चलता, उसके खाते से रकम निकल चुकी होती थी।