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Faridabad News: कोच की कुर्सी पर धूल... खिलाड़ियों की पदक की राह धुंधली

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- जिले में बॉक्सिंग और बास्केटबॉल समेत 10 खेलों के पद खाली, कोच की कमी पदक जीतने में बन रही बाधा
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सूरज कुमार
फरीदाबाद। जिले के खिलाड़ियों की राह में कोच के खाली पद बाधा बन रहे हैं। सरकार की ओर से खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जिले में प्रमुख खेलों के कोच न होने के कारण स्थानीय खिलाड़ियों की प्रतिभा निखर नहीं पा रही है। उचित मार्गदर्शन न मिलने से शहर के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक लाने से चूक रहे हैं।

जिले में खेल विभाग में कई मुख्य खेलों में लंबे समय से एक भी कोच तैनात नहीं है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक बॉक्सिंग बास्केटबॉल, हैंडबॉल, टेनिस, आर्चरी, स्केटिंग, स्विमिंग, क्रिकेट, खो-खो और बैडमिंटन जैसे लोकप्रिय खेलों के लिए जिले में एक भी सरकारी प्रशिक्षक नहीं है। इन खेलों के बुनियादी गुर सीखने के लिए खिलाड़ियों को खुद ही पसीना बहाना पड़ रहा है।
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इसके साथ ही जिन खेलों के मैदान जिले में मौजूद हैं, वहां भी कोचों के स्वीकृत पद खाली पड़े हैं। वॉलीबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स जैसे पारंपरिक खेलों के लिए भी पर्याप्त संख्या में कोच उपलब्ध नहीं हैं। एक कोच के भरोसे ही पूरे स्टेडियम की व्यवस्था चल रही है, जिससे खिलाड़ियों को पर्याप्त समय नहीं मिल पा रहा है।

निजी अकादमियों की शरण में खिलाड़ी

सरकारी स्तर पर सुविधाएं और कोच न होने का सबसे बड़ा खामियाजा खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। अपने खेल को जिंदा रखने के लिए खिलाड़ी मजबूरन निजी अकादमियों में मोटी फीस देकर अभ्यास कर रहे हैं। जो गरीब खिलाड़ी प्राइवेट एकेडमी का खर्च उठाने में असमर्थ हैं, वे या तो खेल छोड़ रहे हैं या फिर कोचिंग के लिए दूसरे बड़े शहरों का रुख करने को मजबूर हैं। वहीं खिलाड़ियों का कहना है कि हम दिन-रात मेहनत भी कर रहे हैं, लेकिन बिना गाइडेंस के हम राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ जाते हैं। अगर जिले में कोच आ जाएं, तो हम भी पदक जीतकर शहर का नाम रोशन कर सकते हैं।
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कोचों के खाली पदों की सूची खेल निदेशालय को भेजी जा चुकी है। खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही खेलों के लिए प्रशिक्षकों की व्यवस्था की जाएगी।-नीरेश यादव, जिला कार्यकारी खेल अधिकारी
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