प्रतापगढ़ गांव, राजीव काॅलोनी और सेक्टर-56 के निवासी कर रहे हैं विरोध
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। प्रतापगढ़ गांव में स्थापित कचरा पृथक्करण और प्रसंस्करण प्लांट ग्रामीणों के विरोध के चलते नासूर बन गया है। विरोध के चलते करीब एक माह से प्लांट ठप पड़ा हुआ है। ऐसे में प्रतिदिन निकल रहे कचरे को बंधवाड़ी भेजा जा रहा है। ऐसे में करोड़ों के संयंत्र का उपयोग नहीं हो पा रहा है। दूसरी ओर, प्रतापगढ़ समेत आस-पास के गांव और कालोनीवासियों का विरोध जारी है।
शहर में प्रतिदिन 1000 टन नागरिक कचरा उत्पन्न होता है। वर्षों से शहर कचरा निपटान संकट से जूझ रहा है। नगर निगम फरीदाबाद की ओर से प्रतिदिन 350 टन क्षमता वाला प्रतापगढ़ कचरा पृथक्करण और प्रसंस्करण प्लांट एक वर्ष पूर्व शुरू हुआ था। इस दौरान प्रतापगढ़ गांव, राजीव काॅलोनी और सेक्टर-56 के निवासियों ने कचरा पृथक्करण और प्रसंस्करण प्लांट का विरोध शुरू कर दिया।
विरोध के बीच फरवरी 2025 में दोबारा से इस प्लांट को शुरू किया गया। इस बीच ग्रामीणों और सेक्टरवासियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। 12 मार्च को विरोध के बीच बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ 10 ट्रक ठोस अपशिष्ट पदार्थ को प्रसंस्करण के लिए डाला गया। विरोध के बीच प्लांट पर कार्य शुरू नहीं हो पाया। एक माह से करोड़ों की लागत से बना संयंत्र ठप पड़ा है। ऐसे में शहर से निकलने वाले कचरे को निगम की ओर से अन्यत्र कहीं और भेजना पड़ रहा है।
प्रतापगढ़ पृथक्करण एवं प्रसंस्करण प्लांट की दीवार राजीव काॅलोनी से सटी है। कुछ दूरी पर प्रतापगढ़ गांव और सेक्टर-56 है। ऐसे में यहां से कचरे की दुर्गंध से आस-पास के लोगों का रहना मुश्किल है। इससे निवासियों को बीमारियों का भी खतरा है। - दीपक पांचाल, निवासी
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प्लांट में एनजीटी के नियमों की पूरी तरह से पालना भी नहीं हो रही है। इसके लिए हमने एनजीटी में अपील कर रखी है। इसकी सुनवाई 16 मई को होनी है। जल्द ही राजीव काॅलोनी, सेक्टर-56 और प्रतापगढ़ गांव के निवासी इसपर आंदोलन करने की योजना पर विचार कर रहे हैं। - विनोद शर्मा, निवासी
शहर से निकलने वाले कचरे का निस्तारण अलग-अलग प्लांट में किया जाता है। प्रतापगढ़ पृथक्करण एवं प्रसंस्करण प्लांट के लिए वहां के निवासियों से बात चल रही है। उनको समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि इससे यहां के निवासियों को समस्या नहीं होगी। - हितेंद्र शर्मा, संयुक्त आयुक्त नगर निगम फरीदाबाद