फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: पेड़ों की छंटाई न होने से आंधी में उलझ रहे बिजली तार

विज्ञापन
विज्ञापन
जर्जर खंभे और खुले पैनल बॉक्स, बारिश में बन रहे हादसे की वजह
विज्ञापन

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एक सप्ताह में दो बार आई आंधी ने शहर के बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर की पोल खोल दी है। जर्जर बिजली के खंभे, खुले पैनल बॉक्स समेत समय पर पेड़ों की छटाई न होना आंधी में हादसों का कारण बन रहे हैं। इससे शहर और गांवों में आपूर्ति शुरू होने में 12 से 36 घंटे तक लग गए। यही नौबत रही तो अगले तीन माह प्री मानसून और मानसून में बिजली व्यवस्था धराशायी हो सकती है।

फरीदाबाद में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के कुल 41 उपकेंद्र (सब स्टेशन) हैं। इन्हें विद्युत पारेषण विभाग की ओर से 220 केवीए के 5 उपकेंद्र से विद्युत आपूर्ति होती है। इसके अलावा जिले भर में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की ओर से ट्रांसफार्मर, पैनल बॉक्स और पोल का पुराना इंफ्रास्ट्रक्चर बदला जा रहा है। हालांकि, अभी यह कार्य लगभग 60 प्रतिशत ही हो पाया है। ऐसे में अभी पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलने में लगभग दो वर्ष लग जाएंगे। तब तक स्थानीय समस्याओं के अलावा प्राकृतिक आपदाओं से निपटना बड़ी चुनौती है।
विज्ञापन

शहर में 16 और 21 मई को आई आंधी में गिरे पेड़ों ने तारों को अपनी चपेट में ले लिया। 16 मई को तो पूरे शहर की बिजली गुल हो गई और करीब 8 घंटे बाद कुछ ही क्षेत्रों में सुचारू हो पाई। बिजली के तारों के साथ खंभे भी गिरे और बाद में लोड बढ़ने के कारण ट्रांसफार्मर भी फुंके। दोनों ही दिन में कुल 100 से अधिक खंभे आंधी की चपेट में आकर गिर गए। इसके अलावा लोड बढ़ने से 12 से अधिक ट्रांसफार्मर भी फुंक गए।
-
मार्च में एक दो दिन हुआ छंटाई का कमा
मानसून से पूर्व मई और जून में सबसे अधिक आंधी आती हैं। इससे पहले शहरभर में पेड़ों की छटाई हो जानी चाहिए। मार्च में एक-दो दिन निगम की ओर से पेड़ों की छटाई का कार्य चला लेकिन बाद में बंद हो गया। आंधी आने के बाद पेड़ों की टहनियां गिरते समय तारों को अपनी चपेट में ले लेती हैं और तारों के साथ बिजली के पोल भी सड़क पर आ जाते हैं।
विज्ञापन


जिले में लगातार विद्युत उपकेंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है। साथ ही जरूरत के आधार पर जर्जर तार, खंभों, ट्रांसफार्मर और पैनल बॉक्स को बदला जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर पर तेजी से काम चल रहा है। प्राकृतिक आपदा के चलते इस इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचता है लेकिन जल्द से जल्द आपूर्ति सुनिश्चित की जाती है। - जितेंद्र ढुल, अधीक्षण अभियंता पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें