फरीदाबाद। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर खोरी गांव में पहली बार निगम ने नए मकानों पर तोड़फोड़ की कार्रवाई की। कार्रवाई पर ड्रोन से नजर रखी गई। ताकि हंगामा या विरोध प्रदर्शन करने वालों पर समय से कार्रवाई की जा सके। वहीं, तोड़फोड़ वाले क्षेत्र में हर घर पर तीन से चार पुलिसकर्मी तैनात थे। दरअसल गांव में निगम की कार्रवाइ को लेकर कुछ लोग सुबह से लामबंद हो रहे थे। ऐसे में निगम ने लोगों पर नजर रखने के लिए ड्रोन का सहारा लिया।
ड्रोन से जहां पर भीड़ दिखती, पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचकर उन्हें भाग देते थे। इतना ही नहीं खोरी गांव से सटे एक होटल की 12वीं मंजिल से भी तोड़फोड़ की कार्रवाई पर नजर रखी जा रही थी। गांव में कई जगहों पर लोग तोड़फोड़ के विरोध में इकठ्ठा हो रहे थे। ऐसे में दूरबीन की मदद से ऐसे लोगों पर नजर रखी गई। वहीं, सादा वर्दी में भी पुलिस को गांव में तैनात किया गया था। ताकि लोगों के प्रदर्शन को रोका जा सके।
बता दें कि पहले नगर निगम ने खोरी गांव में तोड़तोड़ की कार्रवाई करने की योजना बनाई थी। इस दौरान लोगों ने निगम टीम का विरोध किया था। इसके बाद निगम ने पहले तोड़े गए मकानों का मलबा हटाया और जो बचे थे उन्हें फिर तोड़ा था। सरदार कॉलोनी में मलबा साफ होने के बाद उससे सटे मकानों पर बुधवार को कार्रवाई की गई। एहतियात के तौर पर तोड़तोड़ करने वाले घरों के आगे महिला-पुरुष पुलिसकर्मी तैनात रहे और लोगों को अपने पास ही बैठा लिया। इससे पीड़ित निगम की कार्रवाई का विरोध नहीं कर सके। जिस मकान को तोड़ने के लिए जेसीबी मशीन जाती, उस घर के लोगों को पुलिस बाहर निकाल लेती थी। इससे घर टूटने वाले लोग भी एक साथ इकट्ठा नहीं हो पाए।
सविता ने बताया कि सुबह सात बजे घर पर थी। इसी दौरान अचानक तीन महिलाकर्मी उनके घर में आकर बैठ गई। उन्हें घर से बाहर नहीं जाने दिया गया। दो-तीन घंटे बाद कहा कि घर से बाहर चलो, टूटेगा। उन्होंने बताया कि चंद सेकेंड में जेबीसी मशीन से मकान को ध्वस्त कर दिया गया। विनोद ने बताया कि 50 गज में मकान बनाया था। सुबह काफी संख्या में पुलिस वाले आए और उन्हें अपने पास बैठा लिया। इसके बाद घर को तोड़ दिया।