नीलम-अजरोंदा से बाटा चौक तक सड़क पर जमा रहा पानी, कई जगह वाहनों की रफ्तार थमी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मंगलवार सुबह करीब साढ़े चार बजे शुरू हुई बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की एक बार फिर पोल खोल दी। करीब दोपहर एक बजे तक रुक-रुककर हुई बारिश के बाद कई प्रमुख चौराहों और व्यस्त मार्गों पर पानी जमा हो गया। नीलम-अजरोंदा चौक, एनएचपीसी चौक, अजरोंदा, झाड़सेंतली, सिकरी, बल्लभगढ़ बस स्टैंड, सोहना टी-प्वाइंट, सेक्टर-12 मोड़ और राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर बाटा के पास हनुमान मंदिर के सामने जलभराव रहा। कई स्थानों पर सड़क के किनारे और मुख्य लेन में पानी जमा होने से वाहन चालकों को धीमी गति से निकलना पड़ा।
सुबह के समय जब लोग दफ्तर, स्कूल और अपने काम के लिए घरों से निकले तो कई प्रमुख मार्गों पर उन्हें जलभराव का सामना करना पड़ा। नीलम-अजरोंदा चौक और एनएचपीसी चौक जैसे व्यस्त चौराहों पर सड़क पर पानी जमा होने के कारण वाहनों की रफ्तार प्रभावित हुई। दोपहिया वाहन चालक पानी से बचते हुए निकलते दिखाई दिए। कई जगह वाहन चालकों को सड़क के उस हिस्से से गुजरना पड़ा, जहां पानी की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल था।
मोहना में सबसे अधिक 36 एमएम बारिश दर्ज
जिले में 20 जुलाई की सुबह आठ बजे से 21 जुलाई की सुबह आठ बजे तक हुई बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो मोहना में सबसे अधिक 36 एमएम बारिश दर्ज की गई। गौंछी में 27 एमएम, बल्लभगढ़ में 26 एमएम, दयालपुर और धौज में 22-22 एमएम, फरीदाबाद और बड़खल में 15-15 एमएम तथा तिगांव में 15 एमएम बारिश हुई। बारिश की मात्रा बहुत अधिक नहीं होने के बावजूद कई प्रमुख स्थानों पर जलभराव होना शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। बल्लभगढ़ बस स्टैंड और सोहना टी-प्वाइंट के आसपास भी बारिश के बाद पानी जमा रहा। यहां से बड़ी संख्या में लोग बस और निजी वाहनों से आवागमन करते हैं।
बाटा के पास हाईवे पर भी दिखा असर
राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर बाटा के पास हनुमान मंदिर के सामने और यातायात पुलिस थाने के आसपास जलभराव से यातायात प्रभावित हुआ। हाईवे पर वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण यहां सड़क पर जमा पानी से वाहन चालकों को सावधानी से निकलना पड़ा। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल बारिश के दौरान पंप लगाकर पानी निकालना स्थायी समाधान नहीं है। शहर में जहां बार-बार जलभराव होता है, वहां पानी की निकासी के लिए स्थायी व्यवस्था बनाने की जरूरत है। जलभराव वाले स्थानों पर सड़क की ऊंचाई, नालों की क्षमता और पानी की निकासी के रास्तों की जांच कर समस्या का स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।