फरीदाबाद। बीके सिविल अस्पताल में मरीजों के साथ अस्पताल प्रबंधन की एक के बाद एक मनमानी उजागर हो रही है। बृहस्पतिवार को अस्पताल की एक डाक्टर द्वारा एक जच्चा को तमाचा जड़ने का मामला उजागर हुआ। इसी तरह एक अन्य जच्चा का आरोप है कि उसके 9 दिन के नवजात के इलाज के लिए कभी भर्ती तो कभी डिस्चार्ज का खेल चल रहा है।
एतमादपुर निवासी जच्चा चंद्रकली का आरोप है कि उसका नवजात नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (नीकू) में भर्ती है। बच्चे की जांच कर रही डॉक्टर ने तीन दिन पहले सोमवार को उसे तमाचा जड़ा और उसके बाद से ही उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रही है।
चंद्रकली ने बताया कि 19 दिन पहले प्रसव पीड़ा में पुनीता नाम की आशा ने बीके से एंबुलेंस बुलाई थी, मगर एबुंलेंस देरी से पहुंची थी। इस कारण एंबुलेंस में ही चंद्रकली की डिलीवरी हो गई। इसके बाद से ही चंद्रकली अपनी नवजात संग बीके अस्पताल में भर्ती है।
सोमवार को जांच में पता चला कि उसके बच्चे के पेट में गंदा पानी है। इस पर नीकू में तैनात एक महिला बाल रोग विशेषज्ञ ने चंद्रकली को ही इसके लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उसे डांटना शुरू कर दिया। उसने सफाई देते हुए स्टाफ और डॉक्टर की कमियां उजागर की तो महिला डॉक्टर ने तमाचा जड़ दिया। इसके बाद से ही महिला डॉक्टर ने बच्ची को रेफर करके यहां से ले जाने के लिए कह दिया।
उधर एक अन्य जच्चा लक्ष्मी का आरोप है कि उसके नौ दिन के नवजात के साथ बाल रोग विशेषज्ञ भर्ती और डिस्चार्ज का खेल खेल रहे हैं। लक्ष्मी ने जांच और भर्ती के दस्तावेज दिखाते हुए बताया कि 20 मई को उसकी डिलीवरी हुई थी। इस दौरान नवजात को भी नीकू में दाखिल किया गया, लेकिन 23 मई को डिस्चार्ज कर दिया।
फिर देर शाम एक अन्य डाक्टर ने नवजात को पीलिया की शिकायत बता कर भर्ती कर लिया। इसके बाद फिर 25 मई को नवजात को एक बार फिर स्वस्थ बताकर छुट्टी दे दी गई। इसके बाद शाम को बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चे की हालत नाजुक बताकर फिर से भर्ती कर लिया। अब एक बार फिर नवजात को डिस्चार्ज करने की बात विशेषज्ञ कर रहे हैं। ऐसे में लक्ष्मी को डर है कि अस्पताल में इलाज के नाम पर मजाक चल रहा है।
इसलिए सहन कर रही है जच्चा
एतमादपुर निवासी चंद्रकली ने बताया कि वह तीन बच्चों की मां है। परिवार बेहद गरीब है। पति राजबीर दिन में मजदूरी कर परिवार के लिए रात को खाना बना कर लाता है। उसने इस पूरी घटना की शिकायत पति राजवीर से की है, लेकिन प्रबंधन के खिलाफ कुछ बोलने से डर रही है। क्योंकि डॉक्टर लगातार बच्ची को रेफर कर चंद्रकली को अस्पताल से बाहर निकालने का दबाव बना रही है। बुधवार को चंद्रकली और पति राजवीर से कई दस्तावेज पर जबरन हस्ताक्षर तक करा लिए।
मौन हैं अधिकारी: इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. गुलशन अरोड़ा से बात करने का प्रयास किया गया तो पता चला कि वह चंडीगढ़ गए हुए हैं। कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. विनय गुप्ता से भी बात की गई, मगर वह भी इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहे हैं।