आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने 31 जनवरी 2025 को किया था गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। निवेशकों से ठगी के मामले में गिरफ्तार एसआरएस लिमिटेड के निदेशक विनोद कुमार गुप्ता को जिला अदालत से जमानत नहीं मिली। अदालत में जमानत याचिका दायर कर इनके पक्ष से दलील दी गई कि ये तो साल 2017 तक निदेशक रहे हैं। इनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि इन पर 24 मामले दर्ज हैं। एसआरएस लिमिटेड की दो सहयोगी कंपनियों के खातों से 2 करोड़ रुपये विनोद कुमार गुप्ता के केनरा बैंक के पर्सनल खाते में ट्रांसफर हुए। ये निवेशकों का पैसा था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार की अदालत ने 3 अलग-अलग मामलों में लगाई गईं तीन जमानत याचिकाओं को खारिज कर दिया।
एसआरएस ग्रुप की ओर से फरीदाबाद में लोगों के साथ कंपनी में निवेश करने पर मुनाफा देने की स्कीम लांच कर ठगी की गई। इसे लेकर एसआरएस ग्रुप के खिलाफ फरीदाबाद के कई थानों में एफआईआर लोगों की शिकायत पर दर्ज की गई। आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने मामले में जांच करते हुए एसआरएस ग्रुप की सहयोगी कंपनी एसआरएस लिमिटेड के निदेशक सेक्टर-14 निवासी विनोद कुमार गुप्ता को 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। सेक्टर-31 थाना के 4 मामलों में कार्रवाई करते हुए ये गिरफ्तारी की गई और निदेशक को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया गया।
पुलिस की जांच में सामने आया कि निवेशकों से लगभग 2.76 करोड़ रुपये की ठगी हुई। ठगी का पैसा एसआरएस की सहयोगी कंपनियों मैसर्स बीटीएल इंवेस्टमेंट सिक्योरिटीज लिमिटेड और मैसर्स रजत फिनकैप प्राइवेट लिमिटेड के खातों में आया। इन दोनों खातों से निदेशक विनोद कुमार गुप्ता के केनरा बैंक खाते में 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर हुए। अब सेक्टर-31 थाने में दर्ज तीन एफआईआर में निदेशक की जमानत याचिका अदालत ने खारिज की है।