अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। शहर में प्रदूषित हवा से लोगों को राहत नहीं मिल रही है। वायु गुणवत्ता सूचकांक 356 पहुंच गया है। जिससे एक बार फिर जहरीली हवा से सांसों पर संकट बढ़ गया है। बुधवार पीएम2.5 का स्तर 422 दर्ज किया गया। जिससे लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में काफी समस्या का सामना करना पड़ा। ऐसे में डॉक्टरों ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।
तीन दिन पहले शहर में पिछले सप्ताह के मुकाबले कुछ ठीक बनी हुई थी। वायु गुणवत्ता सूचकांक 320 के आसपास बना हुआ था। हालांकि यह भी प्रदूषण की बहुत खराब श्रेणी में आता है। बुधवार को हवा की गति थमने और वातावरण में नमी बढ़ने से प्रदूषित कण एक बार फिर इकट्ठे होने शुरु हो गए। जिससे हवा गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार बुधवार को फरीदाबाद का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 352 दर्ज किया गया। मंगलवार को एक्यूआई 322 दर्ज किया गया था। स्थानीय लोगों का कहना है कि संबंधित विभागों द्वारा ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान-चार के हटने के बावजूद उसके नियमों के तहत काम करने का दावा किया जा रहा है। इसके बावजूद शहर में प्रदूषण स्तर का बढ़ना चिंता का विषय है। वहीं लगातार नियमों की अनदेखी हो रही है। इस्माइलपुर, रोशन नगर, बसंतपुर, दुर्गा बिल्डर, सेहतपुर, पल्ला, धीरज नगर,सेक्टर-11, सात, बल्लभगढ़, एनआईटी आदि कई क्षेत्रों में खुलेआम कूड़े जलाए जा रहे हैं। इससे शहर में प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है। इसके अलावा शहर में सड़क किनारे पड़े भवन निर्माण सामग्री से भी हवा जहरीली हो रही है। आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम व संबंधित विभाग सबकुछ जानकर भी अंजान बनी है। स्मार्ट सिटी में प्रदूषण को खत्म करने की योजना महज फायलों तक की सिमित है।
सड़कों पर उड़ रही धूल, नियंत्रण के दावे कागजों में
बुधवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में सड़कों पर धूल दिखाई दी। शहीद भगत सिंह चौक से रेलवे रोड की तरफ जाने वाले रास्ते के डिवाइडर पर धूल जमी मिली। एनआईटी 3 स्थित ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज के बाहर सड़क पर बने गड्ढों में मिट्टी भरने के कारण धूल उड़ रही थी। खेड़ी पुल स्थित बाईपास रोड से सेक्टर 29 की तरफ जाने वाले रास्ते पर धूल सड़क तक जमा मिली। सूरजकुंड रोड, फरीदाबाद-गुरुग्राम रोड, सेहतपुर में बाइपास पर सड़क किनारे निर्माण सामग्री से धूल उड़ रही थी। निर्माणाधीप डीएनडी-केएपमी एक्सप्रेस वे पर भी समुचित पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा था।
लोगों की बढ़ी मुश्किलें
ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. प्रवीन मलिक ने बताया कि पीएम2.5 का स्तर 422 पहुंचने से हवा में मौजूद जहरीले कण सांस के माध्यम से सीधे लोगों के फेफडों तक पहुंच रहे हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर रहे हैं। जिससे लोग जल्द बीमार पड़ जाते है। बेहद खराब श्रेणी के प्रदूषण स्तर में सबसे अधिक दिक्कत बच्चों, बुजुर्गों के अलावा कैंसर, अस्थमा, दिल के मरीज आदि को हो सकता है। ऐसे में डॉक्टरों ने लोगों को मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं।
पांच दिनों का एक्यूआई
21 नवंबर- 322 एक्यूआई
20 नवबर- 229 एक्यूआई
19 नवंबर- 327 एक्यूआई
18 नवंबर- 309 एक्यूआई
17 नवंबर-390 एक्यूआई