फरीदाबाद। स्मार्ट सिटी रंगों के उत्सव के लिए तैयार है। शहर में जगह-जगह होली मिलन समारोहों का आयोजन किया जा रहा है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर गले मिल रहे हैं और मिठाइयों के साथ शुभकामनाएं दे रहे हैं। फरीदाबाद में विभिन्न राज्यों से आकर बसे लोग अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार होली मना रहे हैं, जिससे शहर की सांस्कृतिक विविधता और भी रंगीन हो उठी है। शहर में विभिन्न समुदायों द्वारा मनाई जा रही होली ने एकता और भाईचारे का संदेश दिया है।
होली को लेकर लोगों में काफी उत्साह रहता है। हमारे यहां होली की शुरुआत बसंत पंचमी से ही हो जाती है। घरों को दिवाली की तरह सजाया जाता है। शिवरात्रि से एकादशी तक बैठी होली और उसके बाद खड़ी होली मनाई जाती है। पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन सामूहिक रूप से रंगों से होली खेली जाती है। -
दिगम्बर सिंह बिष्ट, अध्यक्ष कुमाऊं सांस्कृतिक मण्डल
होली के दिन पारंपरिक वेशभूषा में कुमाऊं का प्रसिद्ध झोड़ा नृत्य किया जाता है। पूजा के बाद तिल-गुड़ का प्रसाद वितरित किया जाता है। विशेष रूप से आलू के गुटके और खीरे का रायता बनाया जाता है। लोग गांव-गांव जाकर पारंपरिक गीत गाते हैं और अपनी संस्कृति का प्रचार-प्रसार करते हैं। -
नंदन सिंह कड़ाकोटी
हमारे यहां सुबह सात बजे से ही रंगों की होली शुरू हो जाती है। घरों में गुजिया, पूरी, खीर, पकौड़े, पापड़ और कई प्रकार की मिठाइयां बनाई जाती हैं। दोपहर बाद सभी लोग स्नान कर नए वस्त्र पहनते हैं और बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। ढोल-मजीरा के साथ पूर्वांचली गीत गाते हुए लोग एक-दूसरे के घर जाते हैं और पकवानों का आनंद लेते हैं। -
रमाकांत तिवारी, अध्यक्ष, भोजपुरी अवधी समाज
भोजपुरी समाज में होली का त्योहार जिसे स्थानीय भाषा में फगुआ भी कहते हैं। हमारे यहां होली के दौरान ढोलक, झाल और मंजीरे के साथ फाग और जोगीरा (गाली-गीत) गाने का अनूठा रिवाज है। होलिका दहन के बाद गांव के बुजुर्ग राख (भस्म) से एक-दूसरे को तिलक लगाकर भाईचारे का संदेश देते हैं।
चंद्रशेखर, सचिव, भोजपुरी अवधी समाज
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पंजाबी समुदाय के लोग ढोल-नगाड़ों और पंजाबी गीतों पर जमकर नृत्य करते हैं। महिलाएं सुबह से ही विशेष पकवान बनाती हैं। मीठी रोटी को आग पर सेंककर प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। शाम को सभी लोग नए कपड़े पहनकर बड़ों का आशीर्वाद लेते हैं। -
करन भाटिया
हमारे यहां सुबह-सुबह ढोल लेकर दोस्तों के साथ घूमना और रंग-गुलाल से सराबोर होकर जश्न मनाते हैं। देसी घी में बने गोंद के लड्डू, दही भल्ले, खस्ता गुजिया, चिप्स, पापड़ और ठंडाई के साथ भांग की कुल्फी सहित अन्य पकवान बनाए जाते हैं। जब तक ढोल- नगाड़ों पर नृत्य नहीं होता, हमारी होली पूरी नहीं मानी जाती। -
जगदीश भाटिया, प्रधान, महारानी वैष्णो देवी मंदिर, एनआईटी एक
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हमारे यहां सभी लोग फसलों और होलिका देवी की पूजा करते हैं। होली दहन भी किया जाता है। इस कार्य के लिए सभी घरों से बच्चे उपले मांगकर ले जाते हैं। इसके लिए बांस एकत्र किए जाते हैं। आग जलाने के बाद उसमें नारियल डाला जाता है। जिसे प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। -
राजेंद्र पांचाल, प्रधान, महाराष्ट्र मित्र मंडल
महाराष्ट्र में होली शिमगा भी कहते हैं। शिमगा और होलिका दहन तटीय इलाकों में लोग आग के चारों ओर नृत्य करते हैं और बोंब (जोर से चिल्लाना) लगाते हैं। नारियल भी आग में अर्पित किए जाते हैं। होली की बची हुई राख को हमारे यहां काफी पवित्र माना जाता है। हम सभी धुलवड यानि अगले दिन शरीर पर लगाते हैं, इससे सभी नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
परवीन राठौड़, सचिव, महाराष्ट्र मित्र मंडल