फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: करोड़ों खर्च के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल

विज्ञापन
विज्ञापन
लोग गंदगी से त्रस्त, कूड़ा उठान पर प्रतिमाह 80 लाख रुपये होता है खर्च
विज्ञापन



संवाद न्यूज एजेंसी

पलवल। नगर परिषद शहर की सफाई व्यवस्था पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, इसके बावजूद बीते कई वर्षों से हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। शहर में पिछले एक सप्ताह से स्थिति और भी गंभीर हो गई है। शहर के अधिकांश इलाकों में कूड़े के ढेर नजर आ रहे हैं।
समय पर कूड़ा उठान न होने से लोग मजबूरी में कचरे को आग लगा रहे हैं, जिससे वायु प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। रेलवे रोड, राष्ट्रीय राजमार्ग, आगरा चौक, रसूलपुर रोड, किठवाड़ी रोड, सिविल लाइन, न्यू कॉलोनी, मोहन नगर और कैलाश नगर जैसे इलाकों में कूड़े के ढेर लोगों की परेशानी बढ़ा रखी है। नगर परिषद का दावा है कि शहर से प्रतिदिन करीब 110 टन कूड़ा निकलता है। नगर परिषद हर महीने शहर की सफाई पर करीब 80 लाख रुपये खर्च करती है। इसके बावजूद शहर की सफाई राम भरोसे है। शहर में गंदगी का कारण बढ़ती आबादी भी है। बढ़ती आबादी व्यवस्था पर भारी पड़ रही है। बीते कुछ वर्षों में पलवल में करीब दो दर्जन नई कॉलोनियां विकसित हुई हैं। इसके साथ ही कुसलीपुर, धौलागढ़, काशीपुर, किठवाड़ी, फिरोजपुर, आल्हापुर समेत कई गांवों को नगर परिषद सीमा में शामिल किया गया है। इसके बावजूद सफाई कर्मियों, वाहनों और अन्य संसाधनों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। इसका असर अब सड़कों पर कूड़े के ढेर के रूप में दिखने लगा है।
विज्ञापन


शहर का पिछले पांच साल में सबसे खराब प्रदर्शन रहा


सफाई व्यवस्था की बदहाली का असर स्वच्छता सर्वेक्षण में भी दिखा था। जुलाई माह में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय द्वारा जारी सर्वेक्षण में पलवल को 824 शहरों में से 427वां स्थान मिला था। यह पलवल का पिछले पांच साल में सबसे खराब प्रदर्शन रहा था। पलवल वर्ष 2023 के सर्वेक्षण में 266वें स्थान पर आया था। 2022 में फिर 295वें स्थान पर आया था। 2021 में 342 तथा 2020 में 357 वें स्थान पर। जबकि 2019 में 283वें स्थान पर आया था। वर्ष 2018 में 246 वें स्थान पर रहा था।

चुनिंदा जगहों से ही उठता है कूड़ा

यह रैंकिंग नगर परिषद और जिला प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी मानी जा रही थी। इसके बावजूद परिषद ने अपनी खामियों को दूर करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए। नगर परिषद ने जुलाई में 2 करोड़ 40 लाख रुपये की लागत से एक निजी कंपनी को तीन महीने के लिए काम सौंपा था। जिसे अक्टूबर में फिर बढ़ा दिया गया लेकिन हालात जस के तस बने हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर परिषद की टीमें केवल कुछ चुनिंदा क्षेत्रों में ही कूड़ा उठान करती हैं, जबकि बाकी इलाकों में कचरा खुले में पड़ा रहता है।
विज्ञापन


वर्जन-


सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए लगातार कदम उठाया जा रहा है। जहां भी किसी तरह की कमी सामने आएगी, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। शहर में कहीं भी कूड़े का ढेर पाया गया तो उसका तुरंत उठान कराया जाएगा। - डॉ. यशपाल शर्मा, चेयरपर्सन, नगर परिषद
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें