फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Faridabad News: 21 करोड़ खर्च के बाद भी स्वच्छता में फिसड्डी औद्योगिक नगरी

विज्ञापन
विज्ञापन
निगम अधिकारियों की लापरवाही से शहर की सुंदरता हो रही धूमिल
विज्ञापन


संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। नगर निगम को स्वच्छ भारत मिशन के तहत औद्योगिक नगरी को स्वच्छ बनाने के लिए पिछले चार वर्ष में लगभग 32 करोड़ 22 लाख 32 हजार 146 रुपये का बजट मिला। इसमें नगर निगम अधिकारियों ने शहर की स्वच्छता पर 21 करोड़ 23 लाख 89 हजार 82 रुपये खर्च किए, जबकि प्रदेश सरकार को 12 करोड़ 78 लाख 6 हजार 607 रुपये वापस कर दिया। बावजूद इसके नगर निगम शहर को साफ रखने में असफल हो रहा है। यही कारण है कि औद्योगिक नगरी इस वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में फिसड्डी रहा। शहर ने 2024 स्वच्छता सर्वेक्षण रैंकिंग में 446 शहरों की सूची में 381वीं रैंक हासिल की। जबकि 20 शहरों में 19वें स्थान पर रहा। नगर निगम अधिकारियों की यह लापरवाही शहर की सुंदरता और सरकार की छवि को धूमिल कर रही है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में व्यक्तिगत घरेलू शौचालय (आईएचएचएल) बनवाने के लिए नगर निगम को वर्ष 2015 से 2018 में 19 करोड़ 62 लाख 5 हजार रुपये का बजट मिला था। इसमें नगर निगम अधिकारियों ने 10 करोड़ 99 लाख 60 हजार रुपये के शहर और ग्रामीण क्षेत्र में शौचालय का निर्माण करवाने का दावा कर 8 करोड़ 62 लाख रुपये सरकार को वर्ष 2021 में वापस कर दिया। वहीं, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए नगर निगम को 6 करोड़ 70 लाख 90 हजार 146 रुपये मिले। निगर निगम की ओर से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट पर पूरा पैसा खर्च कर दिया गया। इसके अलावा लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए सरकार की ओर से नगर निगम को 3 करोड़ 68 लाख 7 हजार रुपये का बजट जारी किया गया। सामुदायिक शौचालय के निर्माण के लिए प्रदेश सरकार की ओर से 5 करोड़ 52 लाख 50 हजार रुपये का बजट नगर निगम को दिया गया। इसमें से नगर निगम अधिकारियों ने 3 करोड़ 17 लाख 48 हजार 82 रुपये के शौचालय का निर्माण करवाया और बाकी बचे हुए 2 करोड़ 35 लाख 45 हजार 118 रुपये सरकार को वापस कर दिया।
विज्ञापन


कागजों में बने शौचालय
आईपी कॉलोनी निवासी केतन सूरी का आरोप है कि सरकार पिछले चार वर्ष में शहर को स्वच्छ बनाने के लिए नगर निगम को करोड़ों रुपये का बजट दे चुकी थी। इसके बावजूद नगर निगम शहर को साफ रखने में फिसड्डी रहा है। शहर में व्यक्तिगत घरेलू शौचालय, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट, स्वच्छता के प्रति जागरूकता अभियान और सामुदायिक शौचालय का निर्माण निगम अधिकारियों ने केवल कागजों में कराया है। शहर की स्वच्छता के लिए आए करोड़ों रुपये का बंदरबांट कर अधिकारियों ने केवल अपनी जेब भरी है। केतन सूरी ने नगर निगम अधिकारियों द्वारा खर्च किए गए बजट की मुख्यमंत्री से जांच की मांग की है। सेक्टर-29 के आरडब्ल्यूए पदाधिकारी सुबोध नागपाल ने बताया कि नगर निगम ने करोड़ों रुपये खर्च कर शहर में शौचालय का निर्माण करवाया था। वह सभी कंडम हो चुके हैं।
विज्ञापन


वर्जन
शहर को साफ और स्वच्छ रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शहर में कई जगह बने कूड़े के खत्तों को खत्म किया गया है। वहां सेल्फी पाइंट बनाए गए हैं। नगर निगम के सफाई कर्मचारी घर-घर से कूड़े का उठान कर रहे हैं। - ओमबीर, अधीक्षण अभियंता नगर निगम।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें