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Faridabad News: सिरोही झील में नहाते समय डूबा दिल्ली का युवक, मौत

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-पांच दोस्तों के साथ दिल्ली से घूमने आया था रामा शंकर
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सचिन कुमार
फरीदाबाद। धौज थाना क्षेत्र की सिरोही झील में शनिवार दोपहर नहाने के दौरान दिल्ली निवासी एक युवक की डूबने से मौत हो गई। मृतक की पहचान दिल्ली के फतेहपुर डेरा संजय कॉलोनी निवासी रामा शंकर (24) के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर मोर्चरी में रखवा दिया है, जिसका रविवार को ईएसआई अस्पताल में पोस्टमार्टम कराया जाएगा।


दिल्ली से शनिवार दोपहर रामा शंकर अपने पांच दोस्तों सोम, बबलू, सत्यम, मोहित और अमित के साथ सिरोही झील घूमने आया था। दोपहर करीब दो से तीन बजे सभी दोस्त झील में नहाने लगे। दोस्तों के अनुसार, रामा शंकर को तैराकी कम आती थी, इसलिए वह किनारे पर ही नहा रहा था। बीच में वह गहरे पानी की ओर चला गया और डूबने लगा। उसे डूबता देख दोस्तों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। शोर सुनकर पास से गुजर रहा समीर नामक स्थानीय युवक मदद के लिए आगे आया।
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रामा शंकर को बचाने के लिए समीर और उसके दोस्तों ने एक-दूसरे को डोरी से बांधा और मशक्कत के बाद उसे पानी से बाहर निकाला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और अचेत अवस्था में रामा शंकर को उपचार के लिए अल-फलाह यूनिवर्सिटी अस्पताल लेकर गई। वहां जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रामा शंकर अविवाहित था और उसके परिवार में एक बड़ा भाई व एक शादीशुदा बहन है। मामले में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है।

16 साल में 100 से अधिक मौतें

अरावली की इन कृत्रिम झीलों में बीते 16 वर्षों के दौरान 100 से अधिक युवा अपनी जान गंवा चुके हैं। वर्ष 2009 से अब तक हादसों का सिलसिला जारी है, इसके बावजूद प्रशासन सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि झील के आसपास न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं और न ही तारबंदी की गई है। पुलिस और वन विभाग की गश्त न होने के कारण बाहरी युवा पगडंडियों के रास्ते यहां तक पहुंच रहे हैं।



सोशल मीडिया पर मिनी लद्दाख से प्रचारित चमक खींच रही मौत की ओर



सिरोही झील को सोशल मीडिया पर मिनी लद्दाख और पेंगोंग झील के नाम से प्रचारित किया जा रहा है। इंटरनेट पर सुंदर फोटो और वीडियो देखकर दिल्ली-एनसीआर के युवा यहां फोटोशूट, रील बनाने और पिकनिक मनाने आते हैं। झील का नीला और साफ पानी युवाओं को आकर्षित करता है, जो बिना गहराई का अंदाजा लगाए पानी में उतर जाते हैं और हादसे का शिकार हो जाते हैं।



कैसे बनीं अरावली की ये कृत्रिम झीलें



अरावली की पहाड़ियों में स्थित ये झीलें प्राकृतिक नहीं हैं। वर्ष 1991 तक यहां पत्थर खनन का कार्य चलता था। भारी मशीनरी से की गई गहरी खोदाई के कारण पहाड़ों के बीच सैकड़ों फीट गहरे गड्ढे बन गए। खोदाई के दौरान जमीन के नीचे के जलभृत फटने और बारिश का पानी जमा होने से इन गड्ढों ने स्थायी झील का रूप ले लिया। ये माइनिंग पिट्स सीधे और खड़े ढलान वाले होते हैं, जो इन्हें खतरनाक बनाते हैं।



50 से 100 फीट गहरी होती हैं ये झीलें
इन झीलों की गहराई किनारे से ही अचानक 50 से 100 फीट तक हो सकती हैं। खनन के कारण बनी चट्टानें बहुत चिकनी हैं और उन पर काई जमी होती है, जिससे पैर फिसलते ही व्यक्ति गहरे पानी में चला जाता है। सतह पर जमा मिट्टी और कचरा दलदल का काम करता है। साथ ही, गहराई में पानी का तापमान बहुत कम होने के कारण तैराकों के शरीर में ऐंठन आ जाती है, जिससे बचाव का मौका नहीं मिलता है।
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सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति

झील की ओर जाने वाले रास्तों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। रास्ते में केवल एक पुराना चेतावनी बोर्ड लगा है और कुछ पत्थरों पर लिखे संदेश आसानी से नजर नहीं आते हैं। झील के चारों तरफ कोई बैरिकेडिंग या निगरानी तंत्र नहीं है। स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि यहां स्थायी रूप से लाइफगार्ड की तैनाती की जाए और लोगों के प्रवेश को रोकने के लिए पुख्ता तारबंदी की जाए।



पिछली घटनाओं का आंकड़ा


07 अप्रैल 2026 : दिल्ली निवासी अभिषेक की सिरोही झील में डूबने से मौत।

02 अप्रैल 2025 : 12 दोस्तों के साथ आए युवक की झील में डूबकर जान गई।



12 मई 2024 : दिल्ली के दो मैकेनिकल इंजीनियरों की डूबने से मौत।

18 जून 2023 : दिल्ली निवासी दो युवकों की नहाते समय मौत।



23 अगस्त 2021: खूनी झील में कुलदीप और पंकज की डूबने से मौत।

13 अप्रैल 2017 : सेल्फी लेते समय छात्र की झील में गिरने से मौत।



29 मार्च 2014 : रेडियो जॉकी अभय की सूरजकुंड झील में डूबने से मौत।
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