अभियोजन के अनुसार, बल्लभगढ़ की फ्रेंड्स कॉलोनी निवासी भरत सिंह भाटी के नाम संपत्ति थी। उनके बेटे सूरज की 20 जनवरी 2021 को ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी पत्नी अपने बच्चों के साथ मायके चली गई थी। आरोप है कि गीता संपत्ति अपने नाम कराना चाहती थी और जब भरत सिंह इसके लिए तैयार नहीं हुए तो हत्या की साजिश रच डाली। 20 जनवरी 2022 की रात गीता ने खाने में गोलियां मिलाकर भरत सिंह को बेहोश किया। इसके बाद सैंडी घर पहुंचा और गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। वारदात के बाद दोनों बदरपुर बॉर्डर पर किराये का कमरा लेकर रहने लगे, जहां से क्राइम ब्रांच डीएलएफ ने पहले गीता और बाद में सैंडी को गिरफ्तार किया।
पिस्तौल खरीदने के लिए दिए थे चार हजार रुपये
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की रिपोर्ट के अनुसार, घटनास्थल से बरामद .315 बोर के कारतूस के खोखे और गोली का मिलान उस देसी पिस्तौल से हुआ, जो सह-आरोपी के कब्जे से बरामद की गई थी।अभियोजन पक्ष के मुताबिक, गीता ने ससुर की हत्या की साजिश के तहत देसी पिस्तौल खरीदने के लिए सैंडी को चार हजार रुपये दिए थे।
सैंडी पर पहले से दर्ज हैं 11 आपराधिक मामले
अदालत में पेश किए गए साक्ष्यों के अनुसार, गुरुग्राम निवासी दलीप उर्फ सैंडी उर्फ कालिया से गीता की पिछले 6-7 वर्षों से जान-पहचान थी और दोनों के बीच प्रेम संबंध थे। सैंडी पहले भी हत्या जैसे गंभीर मामलों में जेल जा चुका था और उसके खिलाफ पूर्व में 11 अन्य आपराधिक मामले दर्ज थे।
34 गवाह, 64 दस्तावेजी साक्ष्य, 59वीं पेशी पर फैसला
मुकदमे के दौरान अभियोजन ने 34 गवाह पेश किए और 64 दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के सामने रखे। सुनवाई के दौरान कुछ गवाह अपनी गवाही से मुकर भी गए, लेकिन अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितिजन्य प्रमाणों के आधार पर दोनों को दोषी माना। इस मामले में कुल 58 सुनवाई हुईं और 59वीं पेशी पर अदालत ने दोनों आरोपियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई।