- डॉक्टर और स्टाफ की कमी के कारण रोजाना किया जा रहा चार से पांच महिलाओं को रेफर
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। जिला नागरिक अस्पताल से हर माह 100 से अधिक गंभीर गर्भवती मामलों को अन्य सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में मरीज के तीमारदारों को आर्थिक दबाव के साथ-साथ मानसिक परेशानी को झेलना पड़ती है। वहीं, मां और बच्चे दोनों की जान के साथ भी खिलवाड़ किया जा रहा है। विशेषज्ञों की माने तो गंभीर मामलों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जाने का मुख्य कारण अस्पताल में आईसीयू की सुविधा का उपलब्ध न होना है।
जिला नागरिक अस्पताल में रोजाना ओपीडी में 180 से 200 तक गर्भवती अपने रूटीन चेकअप के लिए आती हैं। साथ ही रोजाना 20 से 25 गर्भवती डिलवरी के लिए आती हैं, लेकिन इन महिलाओं में से गंभीर चार या पांच मामलों को अन्य सरकारी व निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। रेफर किए जाने वाले मामलों में दौरे पड़ने की स्थिति, बीपी हाई, कम हीमोग्लोबिन या फिर एनिमिया ग्रस्त गर्भवतियों के अलावा अन्य कई प्रकार की नाजुक परिस्थितियां शामिल हैं। आंकड़ों के मुताबिक हर माह करीब 120 गर्भवतियों को यहां से रेफर किया जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि अस्पताल में आईसीयू की सुविधा उपलब्ध हो तो इन्हें किसी अन्य अस्पताल में रेफर करने की जरूरत न पड़े।
डॉक्टरों की कमी के चलते नहीं शुरू हुआ आईसीयू वार्ड
जिला नागरिक अस्पताल की व्यवस्था इन दिनों अस्वस्थ दिखाई दे रही है। यहां 18 बेड का आईसीयू वार्ड बनाया जा चुका है, लेकिन बिना डॉक्टर व अन्य स्टॉफ की कमी के चलते इस वार्ड की शुरूआत नहीं हो पाई है। इससे गंभीर परिस्थितियों में मरीजों को अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है। इस संबंध में जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सविता यादव का कहना है कि डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल में आईसीयू वार्ड की शुरूआत नहीं हो पाई है। इस संबंध में कई बार उच्चाधिकारियों को पत्र भेजकर डॉक्टर व अन्य स्टॉफ की मांग की जा चुकी है। लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।