संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति टलने के बाद फरीदाबाद के औद्योगिक जगत ने जो राहत की सांस ली थी, वह बहुत कम समय की साबित हुई। मिडिल ईस्ट में सीजफायर खत्म होने और दोबारा जंग छिड़ने की आशंका से उद्यमी एक बार फिर से परेशान हैं। उद्यमियों का कहना है कि जब भी लगता है कि व्यापार अब पटरी पर आ रहा है, तभी एक नई वैश्विक चुनौती सामने आकर खड़ी हो जाती है।
बता दें कि पिछले तनाव के दौरान उद्यमियों के करोड़ों रुपये का माल और कंटेनर हफ्तों तक बंदरगाहों और सीमावर्ती इलाकों में फंसे रहे थे। जैसे ही स्थितियां सामान्य हुईं, फंसा हुआ स्टॉक सुरक्षित रूप से विदेशी धरती पर पहुंचने लगा था और निर्यात सुचारू हुआ था। लेकिन अब सीजफायर हटते ही सप्लाई चेन के दोबारा टूटने और ऑर्डर रद्द होने का डर सिर उठाने लगा है। फरीदाबाद के औद्योगिक संगठनों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक खिंचा, तो स्थानीय व्यापार को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उद्यमियों की बात
सीजफायर हटने से हमारी चिंताएं फिर बढ़ गई हैं। जब लगा कि व्यापार सुधरेगा, तभी नया संकट आ गया। अब माल भेजने में डर लग रहा है।— वीरपाल सिंह, उद्यमी
मिडिल ईस्ट के रास्ते अभी खुले ही थे कि दोबारा युद्ध की आशंका बन गई। इस अनिश्चितता के कारण हमारे विदेशी ऑर्डर पर फिर तलवार लटक गई है। — आरके भाटी, उद्यमी
सप्लाई चेन पटरी पर लौट रही थी, पर अब दोबारा रुकावट का डर है। वैश्विक बाजार में बार-बार आने वाले इन संकटों से व्यापार करना दूभर हो गया है। — योगराज गर्ग, उद्यमी
कंटेनर्स की आवाजाही शुरू होते ही फिर ब्रेक लगने की नौबत है। जब भी बाजार संभलता है, एक नया अंतरराष्ट्रीय तनाव हमारी पूरी प्लानिंग बिगाड़ देता है। — दीपक प्रसाद, उद्यमी