गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर कानूनी शिकंजा कस गया है। मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट के अतिरिक्त मुख्य सचिव की शिकायत पर छायसां थाने में कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
दरअसल, छायसां स्थित गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने मार्च में कॉलेज को बंद कर दिया था, जबकि कॉलेज में एमबीबीएस के 400 छात्रों का कोर्स पूरा नहीं हो सका है। कॉलेज बंद होने की वजह से छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया। कॉलेज ने एफिलिएशन के लिए जो डेढ़ करोड़ रुपये की राशि जमा कराई हुई थी वो भी 2013 में लैप्स हो चुकी है।
400 से ज्यादा छात्रों ने भविष्य अधर में देख स्थानीय प्रशासन से लेकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज और मुख्यमंत्री मनोहरलाल तक गुहार लगाई थी। स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश पर पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. ओपी कालरा ने कॉलेज प्रबंधन से बात की। ताकि छात्रों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराई जा सके। लेकिन कॉलेज प्रबंधन ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च डिपार्टमेंट ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मामला दर्ज कराया है।
प्रॉपर्टी को भी टेकओवर करेगी सरकार
कॉलेज प्रबंधन पर कानूनी शिकंजा कसने के साथ सरकार गोल्ड फील्ड मेडिकल कॉलेज की प्रॉपर्टी को भी टेकओवर करेगी। सीएम मनोहरलाल ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा भेजी गई फाइल पर मुहर लगा दी है।