फरीदाबाद में पत्रकार पूजा मौत मामले की अहम गवाह ऊषा भाटिया के पति संत भाटिया को उसके भाई-भाभी ने ही पहचानने से इनकार कर दिया था। परिजनों की लापरवाही का शिकार संत भाटिया की मौत भी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में लावारिसों की तरह हुई।
यहां तक कि शव भी दो दिन तक मोर्चरी में पड़ा रहा। वहीं पुलिस का कहना है कि संत भाटिया की मौत प्रथम दृष्टया प्राकृतिक लग रही है। फिलहाल, सोमवार या मंगलवार को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आएगी। इसके बाद ही मौत के कारण स्पष्ट होंगे।
मिली जानकारी के अनुसार, संत भाटिया को 23 मार्च सुबह ग्यारह बजे के करीब लोगों ने प्याली चौक नाले में चक्कर खाकर गिरते हुए देखा था। उन्हें पांच-छह लोगों ने मिलकर बाहर निकाला था और डबुआ के पास स्थित एक गुरुद्वारे में ले जाकर सेवा की थी।
नहलाने के बाद नए कपड़े पहना कर उन्हें गुरुद्वारे में आराम करने के लिए ही लिटा दिया गया था। यह सब गुरुद्वारे के सीसीटीवी फुटेज में कैद है। इस दौरान संत भाटिया ने तीन नंबर में रहने वाले अपने भाई बलबीर उर्फ विक्की का नाम पता भी इन लोगों को बताया था।
23 को दोपहर बाद करीब साढ़े तीन बजे संत की हालत बिगड़ने लगी तो गुरुद्वारे के लोगों ने उन्हीं लोगों को फोन कर सूचना जिन्होंने उन्हें नाले से बाहर निकाला था। आठ लोगों ने उन्हें बलबीर के घर पहुंचाया था लेकिन घर पर मौजूद भाई भाभी ने संत भाटिया को पहचानने से ही इनकार कर दिया था।
इसके बाद लोगों ने उन्हें बीके सिविल अस्पताल में भर्ती करा दिया था। डॉक्टरों ने अज्ञात मरीज के रूप में भर्ती कर डबुआ पुलिस चौकी को रुक्का भेज दिया था। हालत खराब होने पर डॉक्टरों ने संत को सफदरजंग दिल्ली रेफर कर दिया था।
जहां 24 मई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शिनाख्त न हो पाने की वजह से अस्पताल की मोर्चरी में 26 तक उनका शव रखा रहा। दिल्ली पुलिस ने डबुआ चौकी से संपर्क किया तब कहीं जाकर उनकी पहचान हो सकी। सफदरजंग अस्पताल में शुक्रवार को पोस्टमॉर्टम कर उनका शव परिजनों के हवाले कर दिया गया था।