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दो साल में दर्ज हुए दर्जनों मामले, मगर नहीं हुई गिरफ्तारी

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एसआरएस ग्रुप प्रकरण: दो साल में दर्ज हुए दर्जनों मामले, मगर नहीं हुई गिरफ्तारी
- इस बार भी पुलिस ने मामले दर्ज होने के चार दिन बाद की कार्रवाई

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन व निदेशकों सहित अधिकारियों के खिलाफ पिछले दो साल में दर्जनों मामले दर्ज हुए हैं। मगर पुलिस ने कभी भी एसआरएस ग्रुप के निदेशकों को गिरफ्तार करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इतना ही नहीं इस बार भी पुलिस ने एसआरएस ग्रुप के निदेशकों के खिलाफ मामले दर्ज कर उन्हें भूमिगत होने का पूरा समय दिया। मामला दर्ज होने के चार दिन बाद अनिल जिंदल व अन्य निदेशकों की गिरफ्तारी के लिए उनके ठिकानों पर दबिश पुलिस के दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं थी। मामला दर्ज होने के चार दिन बाद गिरफ्तारी के लिए की गई कार्रवाई से साफ है कि पुलिस ने आरोपियों को भूमिगत होने और सबूतों को नष्ट करने के लिए पूरा समय दिया है।
एसआरएस ग्रुप के चेयरमैन अनिल जिंदल सहित निदेशक प्रतीक जिंदल, विनोद गर्ग (मामा), बिशन बंसल, नानक तायल, पीके कपूर, जेके गर्ग और देवेंद्र अधाना सहित कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ चार मार्च को सेक्टर-31 थाने में धोखाधड़ी के 20 मामले दर्ज किए थे। यह पहली बार नहीं है कि एसआरएस ग्रुप के निदेशकों या अधिकारियों के खिलाफ मामले दर्ज न हुए हों। इसके बावजूद पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तुरंत कोई प्रयास नहीं किए। मामला दर्ज होने के चार दिन बाद बृहस्पतिवार आठ मार्च को पुलिस ने सभी निदेशकों के घरों पर दबिश दी। मगर आरोपी नहीं मिले। हालांकि, पुलिस का कहना है कि इनके घरों से कई दस्तावेज, हार्ड डिस्क व लैपटॉप जब्त किए गए हैं। इनकी जांच की जाएगी। ऐसे में अब पीड़ित निवेशकों का कहना है कि आरोपी अंतरिम बेल ले लेंगे और पुलिस शांत होकर बैठ जाएगी।
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आत्महत्या के लिए विवश करने से लेकर मारपीट व धोखाधड़ी के दर्जनों मामले हैं दर्ज
एसआरएस ग्रुप के निदेशकों के खिलाफ एक जून 2016 को थाना शहर बल्लभगढ़ में एसआरएस ग्रुप के निदेशक विनोद गर्ग उर्फ मामा, अमित मित्तल, डीके बर्तन वाले के खिलाफ आत्महत्या के लिए विवश करने का मामला दर्ज हुआ था। सेक्टर-3 बल्लभगढ़ निवासी सतीश चंद गोयल ने एसआरएस ग्रुप के निदेशकों द्वारा पैसे लेने के बाद वापस नहीं लौटाने से परेशान होकर आत्महत्या कर ली थी। सतीश गोयल सुसाइड नोट भी छोड़कर गए थे। इसके अलावा थाना सेक्टर-31, सेंट्रल, भूपानी, एनआईटी व पलवल के होडल थाने में भी मामले दर्ज हैं। 1 जून 2016 से लेकर 4 मार्च 2018 तक एसआरएस ग्रुप के खिलाफ करीब 30 मामले दर्ज हुए, मगर आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई।
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