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बदमाशों के हाथ में लाइसेंसी हथियार...क्यों न हो गैंगवार

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बदमाशों के हाथ में लाइसेंसी हथियार
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नए पुलिस कमिश्नर अमिताभ सिंह ढिल्लो ने 40 शस्त्र लाइसेंस किए निरस्त

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद।
पिछले कुछ समय से पुलिस के हत्थे ऐसे बदमाश चढ़े हैं, जिनके पास से लाइसेंसी हथियार बरामद हुए। बदमाशों के पास हथियारों का लाइसेंस देखकर पुलिस कमिश्नर भी हैरान हैं। विगत सात माह के दौरान ही नए पुलिस कमिश्नर अमिताभ सिंह ढिल्लो ने 40 से ज्यादा ऐसे शस्त्र लाइसेंस निरस्त किए हैं, जोकि बदमाशों के नाम पर जारी किए गए थे। एक के बाद एक बदमाश के पास से मिल रहे लाइसेंसी हथियारों से पता चलता है कि यहां पूर्व में बदमाशों को रेवड़ियों की तरह लाइसेंसी हथियार बांटे गए हैं।
ऐसे में पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं कि आखिर कैसे बिना सत्यापन के इन बदमाशों को हथियारों के लाइसेंस जारी हुए। लाइसेंस प्रक्रिया इस कदर कठिन है कि आम आदमी को पुलिस सत्यापन के कई चरणों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में जब बदमाशों को लाइसेंस जारी किए गए तो उनके सत्यापन में लापरवाही कैसे बरती गई। पुलिस कमिश्नर ने अब इन लाइसेंस जारी करने वाले पुलिस अफसरों की भी गोपनीय जांच शुरू करा दी है।
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विगत सप्ताह क्राइम ब्रांच डीएलएफ ने अशोक हत्याकांड के तीसरे आरोपी हेमराज को धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार किया था। हेमराज के पास शस्त्र लाइसेंस था, जिसे पिछले दिनों पुलिस आयुक्त ने निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद उसने अपने हथियार जमा नहीं करवाए थे। इसका खुलासा करीब एक माह पहले पकड़े गए बलराज भाटी गैंग से जुड़े मनोज मांगरिया व उसके तीन साथियों के पकड़े जाने के बाद हुआ।
मनोज मांगरिया के पास से पुलिस ने चार राइफल व कट्टे बरामद किए थे। बरामद राइफलों में से एक हेमराज की थी। पूछताछ में पुलिस को पता चला कि हेमराज के पास एक पिस्टल भी है, जोकि उसने अपने साले राजीव को छिपाने के लिए दे रखा था। पुलिस ने राजीव को भी गिरफ्तार कर वह पिस्टल बरामद कर ली। राजीव का भी शस्त्र लाइसेंस बना हुआ है और क्राइम ब्रांच ने उसे भी निरस्त करने की संस्तुति करते हुए पुलिस आयुक्त के पास भेज दिया।

नशे के सौदागरों के पास भी था लाइसेंसी हथियार
इस साल फरवरी में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने अकबर खान नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार कर उसके पास से 540 किलो गांजा बरामद किया था। पूछताछ के दौरान पुलिस ने अकबर की निशानदेही पर फरीदाबाद से अशोक, चंदर और इमामुद्दीन को भी गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान पुलिस को पता चला कि दौलताबाद निवासी अशोक के पास शस्त्र लाइसेंस है। पुलिस ने उसके पास से दो शस्त्र लाइसेंस बरामद किए थे। इनमें एक फरीदाबाद से ही बना था, जबकि दूसरा नागालैंड से बनवाया गया था। अशोक ने दोनों लाइसेंस पर पिस्टल भी ली हुई थी। नियमानुसार कोई भी व्यक्ति देश में कहीं भी केवल एक ही शस्त्र लाइसेंस बनवा सकता है। इसकी सूचना मिलने पर पुलिस आयुक्त ने अशोक का लाइसेंस भी रद्द कर उसके खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया था। अशोक के खिलाफ पहले भी कई मामले दर्ज थे।
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आवेदकों ने कई जानकारियां छिपाईं
पुलिस आयुक्त अमिताभ सिंह ढिल्लों ने इस साल 18 जनवरी को पदभार ग्रहण किया था। इसके बाद उन्होंने शस्त्र लाइसेंसों के जांच के आदेश दिए थे। जांच में पता चला कि कई मामलों में लाइसेंस धारकों ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों के बारे में जानकारी नहीं दी थी तो किसी का मामला अंडर ट्रायल था। इसके अलावा भी आवेदकों ने कई जानकारियां छिपाई थी, जिसके बाद पिछले सात माह में करीब 40 शस्त्र लाइसेंस रद्द किए गए हैं।

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