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कई-कई दिन नहीं मिल रही कोविड जांच रिपोर्ट

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फरीदाबाद। संक्रमण काल में एक ओर कोरोना का कहर बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ लोग जांच और टीकाकरण के लिए जागरूक होने लगे हैं। हालांकि इस बीच जांच कराने वाले लोगों को रिपोर्ट लेने के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि समय से रिपोर्ट ही नहीं मिलेगी तो टेस्टिंग का फायदा नहीं। वहीं, स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जिले की 25 फीसदी आबादी की टेस्टिंग (जांच) कर ली गई है। व्यवस्था में कमी नहीं है। रिपोर्ट देने में कोई देरी नहीं।
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जिले में अब तक छह लाख से अधिक लोगों की कोरोना जांच की गई है। इसमें से 51 हजार से अधिक संक्रमित मिले हैं। औसतन सैंपलिंग आबादी के आठ फीसदी लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। ऐसे में जिले में संक्रमण का पीक स्थिति और बिगाड़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी व आंकड़ों के अनुसार बीते तीन माह के मुकाबले अप्रैल में संक्रमण की रफ्तार कई गुना है। इसकी पुष्टि सैंपलिंग आंकड़ें भी कर रहे हैं। दरअसल, अप्रैल माह के बीते 13 दिनों में जिले में 29369 नमूने लिए गए। इसमें 3464 लोग संक्रमित मिले। ऐसे में सैंपलिंग दर पर 12 फीसदी लोग संक्रमित हो रहे हैं।
सरकारी विभाग में कोरोना जांच रिपोर्ट लेने पहुंच रहे लोगों को समय पर परिणाम पता नहीं चल रहे। बुधवार को कई लोग रिपोर्ट लेने पहुंचे लेकिन कर्मचारियों ने छुट्टी कह कर लौटा दिया। इस दौरान पर्वतिया कालोनी से जांच रिपोर्ट लेने आई इंद्रावती ने बताया कि बीते चार दिन से रिपोर्ट का इंतजार कर रही है लेकिन फोन पर या किसी अन्य माध्यम से कोई सूचना नहीं मिली। बुधवार को जांच रिपोर्ट लेने पहुंची लेकिन नहीं मिली। वहीं, इंद्रावती का आरोप है कि प्रचार किया जा रहा है कि विभाग हर दिन काम कर रहा है। ऐसेे में बीते पांच दिन से कौन सा काम हो रहा है वह समझ नहीं पा रही।
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महिला का कहना है कि उसके तीन परिजन संक्रमित मिले हैं, इसके बावजूद लेटलतीफी से वह हैरान है। इसी तरह जवाहर कालोनी व सेक्टर-17 निवासी महेश और सरोज भी रिपोर्ट न मिलने पर परेशानी साझा करते मिले। उनका कहना है कि तीन दिन से जांच रिपोर्ट नहीं मिली। ऐसे में संभव है वह कई लोगों को संक्रमित कर दें। इसमें से एक का पड़ोसी संक्रमित मिल चुका है, जो उपचाराधीन है। लोगों का आरोप है कि हेल्पलाइन नंबर भी नहीं मिल रहा है। ऐसे में विभागीय व्यवस्था लचर हो गई है।
संक्रमण की जांच रिपोर्ट चार दिन बाद भी लोगों को नहीं मिल पा रही। ऐसे में परेशानी कई गुना बढ़ रही है। बुधवार को डॉ भीम राव जयंती का नाम लेकर सरकारी छुट्टी का ऐलान स्वास्थ्य कर्मियों ने किया। कुछ का कहना था कि वह काम तो कर रहे हैं लेकिन जांच रिपोर्ट वर्किंग डे (कार्य दिवस) पर ही मिलेगी। वहीं, एक कर्मचारी ने नाम न बताने पर माना कि दिक्कत है। लोगों को पांच दिन बाद भी रिपोर्ट मिल रही है तो इसे गनीमत मानो। कर्मचारी के अनुसार रिपोर्ट न मिलने के कई कारण हैं। इसमें से खास है सैंपलिंग पर दबाव लेकिन जांच रिपोर्ट की सुध नहीं ली जा रही। अधिकारी कहते हैं कि पॉजिटिव हो तो सूचना दो। हालांकि कर्मचारी इसमें भी परेशान हो रहे हैं।
पहला, सैंपलिंग बढ़ाने का दबाव है लेकिन रिपोर्ट की ओर विभाग का ध्यान नहीं। ऐसे में लेट सैंपल कलेक्ट कर अगले दिन जांच के लिए डिस्पेच किए जा रहे हैं। ऐसे में एक दिन की लेटलतीफी स्वास्थ्य विभाग खुद भी कर रहा है। दूसरा ज्यादा सैंपल होने पर जांच कर्मचारी भी उसे अगले दिन के लिए टेस्टिंग में लगा रहे हैं। तीसरा स्वास्थ्य विभाग के पास अपनी टेस्टिंग लैब नहीं। इससे ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विभाग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (टीएचएसटीआई) व ईएसआईसी अस्पताल के भरोसे ही जांच जारी है, जबकि सैंपलिंग, टेस्टिंग की योजना व जिम्मा विभाग का है।
संक्रमण बढ़ गया है, जांच भी बढ़ाई गई है। इसी कारण मामले सामने आ रहे हैं। अधिकतम 72 घंटों में जांच रिपोर्ट मिल रही है। संक्रमित को तुरंत सूचना दी जा रही है। परेशानी होने पर स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें। लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं।
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- डॉ. रामभगत, कोविड नोडल अधिकारी
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