मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने तीन साल पहले रैली में की थी घोषणा
मिर्जापुर गांव में 80 एमएलडी और प्रतापगढ़ में 100 एमएलडी क्षमता के बन रहे एसटीपी
निर्माण पूरा होने पर 5 लाख लोगों को सीवर ओवरफ्लो की समस्या से मिलेगी निजात
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मुख्यमंत्री घोषणा के तीन साल बाद भी गांव मिर्जापुर में 80 और प्रतापगढ़ में बन रहे 100 एमएलडी क्षमता के सीवर शोधन संयंत्र (एसटीपी) का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। जिससे लोगों को सीवर ओवरफ्लो की समस्या से जूझना पड़ रहा है। गली में बह रहे गंदे पानी से लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। दोनों एसटीपी का निर्माण पूरा होने से शहर के करीब 5 लाख लोगों को राहत मिलेगी। इस योजना पर 240 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
स्मार्ट सिटी में सीवर ओवरफ्लो की गंभीर समस्या रहती है। सबसे ज्यादा दिक्कत डबुआ कॉलोनी, जवाहर कॉलोनी, संजय कॉलोनी, नंगला-भड़ाना चौक, प्रेस कॉलोनी, राजीव कॉलोनी, सेक्टर-23 और बल्लभगढ़ क्षेत्र में बनी हुई है। सालों से गलियों में सीवर का गंदा पानी बहने से लोगों को आवाजाही में काफी परेशानी होती है। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को होती है। गंदे पानी से होकर उन्हें स्कूल जाना पड़ता है। जिससे लोग बेहद परेशान हैं। समस्या के निजात के लिए आए दिन निगम कार्यालय के चक्कर काटते हैं। आए दिन धरना प्रदर्शन करते हैं। सीवर की समस्या का मामला मुख्यमंत्री मनाेहर लाल के समक्ष भी कई बार उठ चुका है। मुख्यमंत्री ने करीब तीन साल पहले शहर में आयोजित रैली में दो एसटीपी बनवाने की घोषणा की थी।
तीन साल से चल रहा निर्माण कार्य
नगर निगम ने मिर्जापुर गांव में 80 एमएलडी और प्रतापगढ़ गांव 100 एमएलडी का सीवर शोधन संयंत्र पर तीन साल पहले काम शुरू कराया था। कोरोना महामारी के कारण परियोजना पर देरी हुई। बीच में ठेकेदार के बिल का समय से भुगतान नहीं होने पर काम प्रभावित हुआ। दोनों एसटीपी को सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका। ऐसे में अब नगर निगम ने ठेकेदार को मार्च तक का समय दिया है। दोनों संयंत्र से ओल्ड फरीदाबाद, ग्रेटर फरीदाबाद व तिगांव के सीवर का पानी शोधित किया जाएगा। वहीं, खेड़ीगांव से मिर्जापुर सीवर शोधन संयंत्र तक सीवर की पांच किलोमीटर मेन लाइन डाली जानी है। बीच में आगरा नहर के पास कुछ जमीन यूपी वन विभाग की है, अब इसकी एनओसी मिल गई है। जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है।
एसबीआर तकनीक से शोधित होगा गंदा पानी
दोनों एसटीपी में एसबीआर (स्केवेंशियल बैच रिएक्टर) तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिससे गंदे पानी को साफ किया जाएगा। शोधित पानी को सिंचाई समेत अन्य कार्यों में प्रयोग में लाया जा सकेगा। सीवर के पानी की बीओडी (बायोलॉजिकल ऑक्सीडेशन डिमांड) 300 तक होती है। इस तकनीक की मदद से यह मात्रा 10 बीओडी तक पहुंच जाएगी। सिंचाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले पानी की बीओडी 30 तक होनी चाहिए।
यमुना में छोड़ा जा रहा गंदा पानी
जीवनदायिनी यमुना नदी काे गंदा करने में प्रशासन भी कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। शहर से कई जगहों पर नालों और सीवर का गंदा पानी बिना शोधित किए यमुना में छोड़ा जा रहा है। इसमें औद्योगिक इकाइयों का कचरा और केमिकल युक्त पानी भी शामिल है। हालांकि नगर निगम और हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण के एसटीपी लगे हैं। कुछ काफी पुराने और कम संख्या में होने के कारण पूरे शहर के सीवर का पानी शोधित नहीं हो पा रहा है। ऐसे में मिर्जापुर में 80 और प्रतापगढ़ में 100 एमएलडी के एसटीपी को जल्द पूरा करने का निगम पर दबाव है।
वर्जन
ग्रैप के कारण काम रुका है। दोनों एसटीपी का निर्माण जल्द पूरा किया जाएगा। मशीनें खरीदी जा रही हैं। दोनों एसटीपी के शुरू होने से करीब पांच लाख लोगों को राहत मिलेगी। - बीके कर्दम, मुख्य अभियंता, नगर निगम