- पांच बार के विधायक और दो बार कैबिनेट मंत्री रहे, कांग्रेस आलाकमान ने वरिष्ठ नेता पर जताया भरोसा
संदीप वर्मा
फरीदाबाद। पांच बार विधायक, दो बार कैबिनेट मंत्री रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता महेंद्र प्रताप ने जाट, मुस्लिम और गुर्जर मतों के दम पर फरीदाबाद लोकसभा के चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। लंबे इंतजार के बाद कांग्रेस आलाकमान ने फरीदाबाद सीट पर उनका टिकट फाइनल कर दिया। कांग्रेस के इस बड़े चेहरे के चुनावी मैदान में उतरने पर मुकाबला रोचक हो गया है। बृहस्पतिवार देर रात महेंद्र प्रताप सिंह की सीट कंफर्म होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। शुक्रवार सुबह उन्होंने अपने परिवार और समर्थकों के साथ तिलपत स्थित सूरदास मंदिर जाकर मत्था टेका और आशीर्वाद मांगा।
फरीदाबाद के एक छोटे से गांव नवादा कोह में महेंद्र प्रताप सिंह (79) जन्मे हैं। उन्होंने नेहरू कॉलेज से स्नातक किया। कांग्रेस प्रत्याशी ने लगभग 57 वर्ष से अधिक समय फरीदाबाद की राजनीति में दिया है। वह जमीनी नेता माने जाते हैं। गुर्जर बिरादरी से आने वाले महेंद्र प्रताप सिंह का फरीदाबाद की सभी जातियों और समाज से बेहतर तालमेल रहा है। वर्ष 1966 में वह 21 साल की उम्र में राजनीति की जमीन पर उतरे और सरपंच चुने गए। वह 1972 में ब्लॉक समिति के चेयरमैन भी चुने गए। 1982 में 22000 वोटों की रिकॉर्ड जीत के साथ वह फरीदाबाद के पटल पर छा गए। इसके बाद 1987, 1991, 2005, 2009 में मेवला महराजपुर और बड़खल क्षेत्र से विधायक चुने गए। उन्होंने वर्ष 1977 से वर्ष 2014 तक के सभी नौ विधानसभा चुनाव लड़े, जिसमें पांच बार विधायक चुने गए। प्रत्याशी बनने के बाद शुक्रवार को पूरे दिन उन्हें लोगों की बधाइयों का तांता लगा रहा।
दो बार बने कैबिनेट मंत्री
महेंद्र प्रताप ने हरियाणा सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया। 1991-96 में वह (खाद्य एवं आपूर्ति) और दूसरी बार 2009-14 में (बिजली, उद्योग, श्रम और रोजगार, स्थानीय निकाय, नवीकरणीय ऊर्जा, खाद्य आपूर्ति, राजस्व, तकनीकी शिक्षा) मंत्री रहे। वह 1987 से 1991 तक कांग्रेस विधायक दल के नेता भी रहे।
कांग्रेस से मनमुटाव में कई बार छोड़ी पार्टी
महेंद्र प्रताप अधिकांश समय कांग्रेस में रहे लेकिन कांग्रेस से मनमुटाव हुआ तो कांग्रेस छोड़ दी। वह लोकदल से कांग्रेस में शामिल होकर 1987 में चुनाव जीते। फिर वर्ष 2000 में कांग्रेस ने टिकट नहीं दिया तो बसपा में गए। यहां वह 161 मतों से चुनाव हार गए। इसके बाद दोबारा कांग्रेस में शामिल हुए।